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काम की बात: पूरे देश में वैध हैं 50 पैसे से लेकर 10 रुपये तक के सिक्के, आरबीआई ने दी जानकारी

Thu, 28 Apr 2022 12:26 AM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, हिसार (हरियाणा)

सार

नोट पर कुछ लिखा हो, स्याही लगी हो तो भी उसे बैंक में जमा कर सकते हैं। वित्त मंत्रालय भारत सरकार की तरफ से आरटीआई कार्यकर्ता को लिखित रूप से यह जानकारी दी गई है। 
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सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
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50 पैसे से लेकर 10 रुपये तक के सभी सिक्के पूरे देश में वैध मुद्रा के रूप में प्रचलन में हैं। सिक्कों को बैंकों में जमा कराने की कोई सीमा निर्धारित नहीं की गई है। इसके अलावा नोट पर भी कुछ लिखा होने, स्याही या रंग लगे होने पर लेने से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे नोट को बैंक में भी बदला जा सकता है। यह जानकारी सूचना अधिकार अधिनियम के तहत आरटीआई कार्यकर्ता डॉ. प्रमोद अग्रवाल गोल्डी की ओर से पूछे गए सवाल के तहत वित्त मंत्रालय भारत सरकार ने दी है।  

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बता दें कि कुछ दिन पहले ही चरखी दादरी के इमलोटा में नकली सिक्के बनाने की फैक्टरी पकड़ी गई थी। मामला सार्वजनिक होने के बाद फिर से असली और नकली सिक्कों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। तमाम दुकानदार सिक्कों को नकली तो कुछ सरकार की तरफ से बंद होने का हवाला देने लगे, हालांकि यह केवल अफवाह ही है। 

वित्त मंत्रालय भारत सरकार के आर्थिक कार्य विभाग के लोक सूचना अधिकारी जेसी जैकब के अनुसार वर्तमान में भी 50 पैसे का सिक्का पूरे देश में वैध मुद्रा के रूप में प्रचलन में है। आरबीआई ने यह भी स्पष्ट रूप से अवगत कराया है कि 50 पैसे से लेकर 10 रुपये तक के सभी सिक्के वैध हैं।
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कटे-फटे नोट बदले जा सकते हैं
डॉ. प्रमोद अग्रवाल गोल्डी ने भारतीय रिजर्व बैंक के लोक सूचना अधिकारी सुमन राय से नोटों के संबंध में भी जानकारी मांगी थी। इसके जवाब में बताया गया है कि यदि किसी नोट पर रंग,  इंक या पेन से कुछ लिखा हो तो ऐसे नोट भी बैंकों में जमा किए जा सकते हैं। साथ ही कटे-फटे एवं अपूर्ण नोट भी भारतीय बैंक नोट वापसी नियमावली  2009 एवं संशोधित नियमावली 2018 द्वारा बैंकों में स्वीकार किए जाएंगे।

अफवाहों पर न दें ध्यान, लें कानूनी सहारा
भारत सरकार के वित्त मंत्रालय ने 50 पैसे व उससे ऊपर 10 रुपये तक के सिक्कों को पूरी तरह से वैध बताया है। इनके प्रचलन को बाधित करने वाले पर विधिक कार्रवाई हो सकती है। अफवाहों की आड़ लेकर तमाम दुकानदार एक रुपये के नए सिक्के भी लेने से इनकार कर देते हैं, ऐसे मामलों में लोग कानून का भी सहारा ले सकते हैं। 

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