सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट पशु डेयरियों को शहर से बाहर शिफ्टिंग के मामले में अड़ंगा आ गया है। नगर निगम द्वारा जोन वाइज ढूंढी गई जमीन पंचायत और एचएयू ने देने से इंकार कर दिया है। दो स्थानों पर 25-25 एकड़ जमीन न मिलने पर इस प्रोजेक्ट पर फिलहाल ब्रेक लग गया है। हालांकि केवल एक जोन के लिए नगर निगम ने फाइल चला दी है, लेकिन अभी तक यह जमीन भी मिल पाई है या नहीं, स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है। सीएम ने घोषणा की थी हिसार में पशु डेयरियों को शहर से बाहर किया जाएगा, जिसको लेकर शहर के चारों तरफ चार जोन में 25-25 एकड़ जमीन पर डेयरियां बनाई जाएंगी। एचएयू और देवा की पंचायत द्वारा जमीन देने से इंकार करने की रिपोर्ट निगम अधिकारियों ने सरकार के पास भेज दी है।
निगम ने यह देखी थी जमीन
नगर निगम ने इस प्रोजेक्ट के लिए कई स्थानों पर जमीन देखी थी, जिसको लेकर बालसमंद रोड पर एचएयू (हरियाणा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी ऑफ हिसार) की नहर के साथ लगती 31 एकड़ जमीन, जो काफी समय से बंजर पड़ी है। दूसरी जगह देवा गांव की पंचायत के पास 24 एकड़ जमीन। भगाना और धांसू रोड पर जमीन देखी गई थी, लेकिन इनमें से भगाना और धांसू रोड की जमीन डीसी एवं निगम आयुक्त ने ही रिजेक्ट कर दी थी। पांचवीं जगह जमीन बगला रोड पर देखी गई थी, जो कई सालों से नगर निगम जीएलएफ से लेने के लिए प्रयास कर रहा था।
देवा : गरीब लोग खेती से करते हैं गुजारा, नहीं दे सकते जमीन
नगर निगम ने पंचायत से देवा गांव में 24 एकड़ जमीन पशु डेयरियों के लिए मांगी थी। देवा की पंचायत ने रेजुलेशन पास करने से इंकार कर दिया है। अब निगम को पंचायत ने कहा कि वे यह जमीन नहीं दे सकते। पंचायत के पास थोड़ी ही जमीन है। ये जमीन अगर निगम को दे दी तो वे खेतीबाड़ी बिना कैसे अपना घर खर्च चलाएंगे।
एचएयू : हमारे प्रोजेक्ट में है, नहीं दे सकते 31 एकड़ जमीन
एचएयू ने भी कहा कि वे यह जमीन सेल नहीं कर सकते। यह जमीन एचएयू के प्रोजेक्ट में है, जबकि निगम ने अपनी तरफ से लिखा था कि यह बालसमंद रोड स्थित नहर के पास बंजर और सेम की जमीन है, इसे नगर निगम सीएम घोषणा के डेयरी शिफ्टिंग प्रोजेक्ट में लेकर शहर के लोगों को सुविधा दी जा सकती है।
केवल 50 एकड़ जमीन को लेकर फाइल आगे भेजी
नगर निगम ने फिलहाल जीएलएफ की बगला रोड स्थित 50 एकड़ जमीन को लेकर फाइल भेजी है, जिसको लेकर जीएलएफ ने नगर निगम की 50 एकड़ जमीन की डिमांड महानिदेशक को भेजी हुई है।
शहर में हैं 300 डेयरियां
नगर निगम ने इस प्रोजेक्ट को लेकर करीब डेढ़ साल पहले सर्वे करवाया था। शहर में करीब 300 डेयरियां हैं। इनमें छोटी-बड़ी सभी डेयरियां शामिल हैं।
यह होगा फायदा
शहर में डेयरियां होने से स्मार्टसिटी में भी अड़ंगा लग रहा है। दूसरा डेयरियां होने से सीवरेज ब्लॉकेज और गंदगी की समस्या सबसे बड़ी है। लोग सीवरेज में ही पशुओं का गोबर बहा देते हैं, जो सीवरेज को ब्लॉक कर देता है। गलियों और सड़क के किनारे लोग गोबर के ढेर लगा देते हैं, जिससे शहर गंदा नजर आता है। डेयरियां बाहर शिफ्ट होने से सीवरेज ब्लॉकेज की समस्या और गंदगी की समस्या खत्म हो जाएगी।
देवा गांव की पंचायत और एचएयू ने निगम को जमीन देने से इंकार कर दिया है। निगम ने फिलहाल बगला रोड स्थित 50 एकड़ जमीन जीएलएफ से मांगी है।
- जगदीश, म्यूनिशिपल इंजीनियर नगर निगम