न निगम और हुडा के वादों की जरूरत न लंबी चौड़ी टीम की। बस जरूरत है तो जागरूकता और सहयोग की। सहयोग भी ऐसा न बोझ लगे और न ही परेशानी। शहर के लोग जिंदल चौक स्थित सत्या इनक्लेव इसी का उदाहरण है। 82 मकानों का यह ब्लॉक एक मिनी कॉलोनी है। इर कोई इस कॉलोनी को एक बार देखने की इच्छा जाहिर करता है।
शहर की नहीं प्रदेश की पहली कॉलोनी जहां इनवर्टर से जलती हैं स्ट्रीट लाइट
सत्या इनक्लेव शहर की नहीं बल्कि प्रदेश की पहली कॉलोनी हो सकती है जहां स्ट्रीट लाइटें इनवर्टर से जलती हैं। सत्या वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान डीडी गुप्ता का कहना है कि सभी कॉलोनिवासियों की मदद से उन्होंने अपने दम पर एक अलग से लाइन बिछाई। इस लाइन पर 30 से अधिक 18-18 वाट के सीएफएल लगाए। दो बैटरी व इन्वर्टर खरीदे गए। जब भी बिजली गुल हो तो सड़कों पर जरा भी अंधेरा नहीं रहता।
कॉलोनी के दोनों गेट पर सिक्योरिटी गार्ड और सीसीटीवी की नजर भी
सत्या इनक्लेव में 82 घरों का एक ब्लॉक बनाया हुआ है। इस ब्लॉक के दो गेट बनाए गए हैं। इन दोनों गेट पर सिक्योरिटी गार्ड ड्यूटी देते हैं। इतना ही नहीं कॉलोनी में हाईटेक नजरें भी निगरानी कर रही हैं। दोनों ही गेट पर कौन आया कौन कब किस वक्त गया पूरा सीसीटीवी में रिकॉर्ड होता रहता है।
हर घर के आगे से उठता है कचरा
सत्या वेलफेयर एसोसिएशन के सदस्य खुद एक रेहड़ी लेकर हर रोज साफ सफाई करने के लिए सुबह सुबह निकलते हैं। करीब पौने घंटे में ये लोग साफ सफाई का काम कर देते हैं। हर घर के सामने से रेहड़ी लेकर कचरा उठाते है। फिर इस कचरे को हुडा के कचरा लेकर जाने वाली ट्रॉली में डाल दिया जाता है।
सड़क पर बनाए आठ कचरा बॉक्स ताकी न फेंके कोई ऑन रोड कचरा
कॉलोनी में सड़क पर कोई कचरा न डाले इसको लेकर ऑन रोड दीवारों के साथ डस्टबिन फिट करवाए गए हैं। इन डस्टबिन में आने जाने वाले लोग कचरा डाल देते हैं। हर रोज सत्या वेलफेयर एसोसिएशन टीम इसकी सफाई करती है। एकत्रित कचरा उठाया जाता है।
खुद की सड़कों की रिपेयरिंग
कॉलोनीवासियों के आर्थिक सहयोग से एसोसिएशन ने सड़कों की रिपेयरिंग तक करवाई है। साफ सफाई से लेकर हरियाली पर भी पूरा फोकस किया गया है। लोगों को जागरूक करने के लिए यहां हर सुबह सत्या इनक्लेव का रिकॉर्ड करवाया गया गीत भी बजाया जाता है।
सबसे पहले जागरूकता की जरूरत है। यहां साफ सफाई, स्ट्रीट लाइट, सिक्योरिटी, सहित हर तरह के काम पर 82 घरों का आर्थिक सहयोग रहता है। हर घर पर महीने का केवल 500 सौ रुपये खर्च आता है
- डीडी गुप्ता, प्रधान सत्या वेलफेयर एसोसिएशन