हिसार। कहने को तो आज विश्व पर्यावरण संरक्षण दिवस है। इसका मतलब है कि हमें पर्यावरण को संरक्षण करना है और इसे प्रदूषित होने से बचाना है। मगर हकीकत यह है कि पिछले 22 दिनों से शहरवासी दूषित हवा में सांस ले रहे हैं। उधर, जिला प्रशासन शहर की हवा को दूषित होने से बचाने के लिए कोई कदम नहीं उठा रहा है।
प्रदूषण बोर्ड का काम प्रदूषण रोकना है, जो पूरी तरह से मौन है। जिला प्रशासन ने भी शहर में दो-तीन पानी का छिड़काव करवाकर अपनी ड्यूटी पूरी कर ली। जिला प्रशासन का पूरा ध्यान सिर्फ पराली को जलने से रोकना है, लेकिन उसमें भी वह पूरी से फेल साबित हुआ है। शहर की हवा एनसीआर एरिया के भी ज्यादा दूषित है। बावजूद इसके प्रदूषण कम करने को लेकर कोई उपाय नहीं किए गए।
22 दिनों में एक्यूआई की स्थिति
एक्यूआई प्रदूषण की स्थिति दिन
400 से 500 गंभीर 06
300 से 400 बहुत खराब 14
200 से 300 खराब 02
पिछले वर्ष 295 तो इस बार अब तक 226 जगह जलाई पराली
जिला प्रशासन का पूरा जोर सिर्फ पराली जलाने से रोकने पर है। प्रशासन बार-बार यह दावा भी कर रहा है कि हमने पराली जलाने के मामलों की संख्या काफी कम कर दी है। हालांकि आंकड़े कुछ और ही बता रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार पिछले वर्ष जिले में 295 जगहों पर पराली जलाई गई थी, जबकि इस वर्ष अब तक 226 मामले पराली जलाने के आ चुके हैं।
एनसीआर एरिया से ज्यादा प्रदूषित शहर
दिनों-दिन बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए एनसीआर एरिया में एहतियात के लिए काफी कदम उठाए गए। मगर हैरानी की बात है कि हिसार शहर एनसीआर एरिया से ज्यादा प्रदूषित है और यहां जिला प्रशासन की तरफ से कोई कदम ही नहीं उठाया गया।
प्रदूषण की स्थिति (शुक्रवार शाम चार बजे)
हिसार 359
गुरुग्राम 336
फरीदाबाद 387
बहादुरगढ़ 350
मानेसर 330
सोनीपत 304
ये कहती हैं रिसर्च
एक रिसर्च के अनुसार अगर एक्यूआई 400 से 500 के बीच में है और हम ऐसी हवा में दिनभर सांस लेना 40 सिगरेट पीने के बराबर होता है। गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. राजेश लोहचब के अनुसार इस समय मौसम की स्थिति ऐसी बनती है कि प्रदूषण ऊपर नहीं उठ पाता और वह पर्यावरण में रह जाता है। इस प्रदूषण में वाहनों का धुआं, आतिशबाजी, कूड़े का जलना, निर्माण कार्यों के कारण उठने वाली धूल, फैक्टरियों का धुुएं आदि शामिल होता है।
दिल्ली व एनसीआर के मुकाबले यहां स्थिति ठीक है। एहतियात के तौर पर पराली जलाने से रोकने के लिए हमारी टीमें लगातार काम कर रही हैं। पिछले साल के मुुकाबले इस साल पराली जलाने के आधे मामले सामने आए हैं। प्रदूषण को लेकर जागरूक करने के लिए प्रशासन की तरफ से नुक्कड़ नाटक व जागरूकता रैली निकाली जा रही हैं। - डॉ. प्रियंका सोनी, उपायुक्त