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प्रदेश के खेल कैलेंडर से शतरंज गायब

Sat, 02 Jan 2016 01:56 AM IST
अमर उजाला हिसार/ब्यूरो
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शिक्षा विभाग के अधिकारियों की भूल प्रदेश के शतरंज खिलाड़ियों पर भारी पड़ रही है। प्रदेश के स्कूली खेल कैलेंडर से ही इस खेल को गायब कर दिया है, नतीजतन यहां के खिलाड़ी 8-12 जनवरी तक तेलंगाना में होने वाले 61वें नेशनल स्कूली शतरंज खेलों में भाग लेने से वंचित रह सकते हैं। इन खेलों में शामिल होने के लिए ऑनलाइन एंट्री भेजने की अंतिम तिथि दो जनवरी है।
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स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा 61वें नेशनल स्कूली शतरंज खेलों में भाग लेने के लिए प्रदेश शिक्षा विभाग को 10 दिसंबर को पत्र जारी कर आमंत्रित किया जा चुका है और पत्र में ऑनलाइन एंट्री के लिए दो जनवरी अंतिम तिथि निर्धारित है।

नेशनल खेलों का आयोजन 8 से 12 जनवरी तक तेलंगाना में होना है, लेकिन शिक्षा विभाग द्वारा अभी तक ट्रायल स्पर्धा की तिथि भी नहीं दी गई है। इसके पीछे कारण यह बताया जा रहा है कि प्रदेश के स्कूली खेल कैलेंडर में ही यह खेल शामिल नहीं किया गया है।
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उधर नेशनल खेलों के ट्रायल स्पर्धा के लिए सिर्फ एक दिन शेष बचा है। 61वें नेशनल स्कूली शतरंज खेलों में देश के सभी प्रदेशों की अंडर 14, 17 व 19 आयु वर्ग के लड़के व लड़कियों की 30-30 सदस्यीय टीमें भाग लेंगी।

स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के महासचिव डॉ. राजेश कुमार मिश्रा ने बताया कि शतरंज नेशनल स्कूली खेल कैलेंडर में तो शामिल है, हरियाणा के खेल कैलेंडर में क्यों नहीं है, इसके बारे में वहां के अधिकारी ही बता सकते हैं।

अभी तक नहीं दी तिथि
हरियाणा शतरंज एसोसिएशन (एचसीए) के प्रदेश महासचिव कुलदीप शर्मा का कहना है शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को कई बार पत्र भेजकर ट्रायल स्पर्धा की तिथि मांग चुके हैं, लेकिन अभी तक नहीं दी गई है।

शिक्षा विभाग शतरंज टीम के चयन के लिए ट्रायल की तारीख देता है तो एचसीए जिम्मेदारी लेने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

ट्रायल स्पर्धा में निष्पक्षता के लिए एचसीए ट्रायल के सभी मैचों का लाइव वेबकास्ट अपने खर्च पर करवाने के लिए भी तैयार है, ताकि बेहतर खिलाड़ी को ही टीम में चुना जा सके।

डीईओ को आती है ग्रांट
नेशनल स्कूली खेलों के लिए शिक्षा विभाग द्वारा जिस जिले में शतरंज ट्रायल स्पर्धा करवाई जाती है, उसके लिए लगभग तीन लाख रुपये की ग्रांट संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी को अलॉट की जाती है। ग्रांट चयनित खिलाड़ियों के आने-जाने, यूनिफॉर्म व खाने-पीने के लिए खर्च होती है।

वर्ष 2015 में लिया था भाग
शिक्षा विभाग कह रहा है कि शतरंज को प्रदेश के खेल कैलेंडर में शामिल नहीं किया गया है, जबकि पिछले वर्ष 15 अप्रैल को जींद में ट्रायल स्पर्धा के माध्यम से चयनित प्रदेश की 30 सदस्यीय टीम ने तमिलनाडू के सेलम शहर में आयोजित प्रतियोगिता में भाग लिया था।

उपायुक्तों को सौंपे गए ज्ञापन
एचसीए के प्रदेश महासचिव शर्मा ने बताया कि शुक्रवार को प्रदेश भर में जिला स्तर पर नेशनल खिलाड़ियों द्वारा एचसीए के नेतृत्व में डीसी को ज्ञापन सौंप ट्रायल स्पर्धा करवाने की मांग की गई है।

ट्रायल स्पर्धा के माध्यम से तीनों आयु वर्गों अंडर 14, 17, 19 में 10-10 खिलाड़ी चयनित किए जाते हैं और इसमें पांच लड़के व पांच लड़कियों की एक टीम होती है जो प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हैं।

स्कूल खेल कैलेंडर में पहले भी शतरंज शामिल नहीं था, क्योंकि हमारे पास बजट काफी कम होता है। पहले भी कैलेंडर में खेल शामिल नहीं होने के कारण परेशानी आई थी और इसका अधिकारियों व शतरंज एसोसिएशन ने कोई हल निकालकर नेशनल गेम्स में खिलाड़ियों को खेलने के लिए भेजा था।
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इस बार बजट बढ़ाने की मांग की गई है, जिससे 2016-17 के स्कूल खेल कैलेंडर में शतरंज को शामिल किया जा सके और इस तरह की समस्या फिर कभी न आए।
ललिता शर्मा, यूथ एंड स्पोर्ट्स ऑफिसर, शिक्षा विभाग
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