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व्हील चेयर से उठ नहीं सकते पर दूसरों का सहारा बखूबी बने प्यारेलाल

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महिलाओं को पढ़ाते इच वन टीच वन संस्था के संयोजक एवं दिव्यांग प्राध्यापक प्यारेलाल। संवाद - फोटो : Hisar
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रवि घोड़ेला
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बालसमंद/हिसार। दुनिया में एक ही दिव्यांगता है, वह है हमारी नकारात्मक सोच। इस बात को सच साबित कर न सिर्फ अपने लिए बल्कि दूसरों के लिए प्रेरणा बने प्राध्यापक प्यारेलाल। इन्होंने अपनी शारीरिक अक्षमता को कमजोरी नहीं बनने दिया। संस्था ईच वन टीच वन के संयोजक एवं प्राध्यापक प्यारेलाल कहते हैं कि किसी अंग का कम होना हमारी ताकत को कम नहीं कर सकता। हमारा हौसला, जज्बा हमें अपंग बना सकता है। हौसला हो तो हम बड़ी से बड़ी जंग दिव्यांग होने के बाद भी जीत सकते हैं।
प्यारेलाल पिछले नौ वर्षों में करीब 1800 महिला-पुरुषों को साक्षर कर चुके हैं। महिला उत्थान के कार्य, स्वच्छता, पौधरोपण, हर घर शौचालय अभियान, कन्या जन्म पर जलवा पूजन और नशा मुक्ति कई अभियान में अग्रणी रहने वाले प्राध्यापक प्यारेलाल को राष्ट्रपति अवॉर्ड के लिए चुना गया है। अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस पर शुक्रवार 3 दिसंबर को दिव्यांग प्राध्यापक प्यारेलाल को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद सम्मानित करेंगे।
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नौ साल में 1800 लोगों को कर चुके साक्षर
किसी भी आम इंसान की तरह प्यारेलाल की आंखों में भी आने वाली जिंदगी को लेकर तमाम सपने थे, लेकिन एक सड़क हादसे ने उनकी पूरी जिंदगी ही बदल कर रख दी। बात वर्ष 2000 की है। हादसे के बाद से प्यारेलाल व्हील चेयर से उठ नहीं सके, लेकिन दूसरों के लिए सहारा बखूबी बने हैं। व्हीलचेयर पर रहकर क्षेत्र के कई गांवों के लोगों को साक्षर बनाने का कार्य किया है। शिक्षक ने ईच वन टीच वन संस्था बनाई और संस्था में अन्य लोगों के सहयोग से साक्षर बनाने का कार्य शुरू किया। शिक्षक की बदौलत आज 1800 लोग दिल्ली ओपन स्कूल से तीसरी एवं पांचवीं कक्षा की मार्कशीट हासिल कर चुके हैं। कुछ महिलाएं तो ऐसी शामिल हैं जो सोलह सत्रह वर्षों से पढ़ाई छोड़ चुकी थी। आज दिल्ली ओपन से दसवीं-बारहवीं पास करके आईटीआई का डिप्लोमा लेकर शहर में ब्यूटी पार्लर चलाकर अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं। प्यारेलाल दिव्यांग छात्रों को भी प्रेरित करते रहते हैं ताकि वे कमजोर महसूस कर अपने हौसले कम न कर दें।
पोते को स्कूल छोड़ने आई महिला के सवाल से मिली राह...
शिक्षक प्यारेलाल एक दिन अपने स्कूल में विद्यार्थियों को पढ़ा रहे थे। तभी एक बुजुर्ग महिला अपने पोते को स्कूल छोड़ने के लिए आई। बुजुर्ग महिला ने शिक्षक प्यारेलाल से पूछा कि क्या इस उम्र में मैं भी पढ़ सकती हूं। शिक्षक ने कहा क्यों नहीं। उसी दिन शिक्षक प्यारेलाल ने ठान लिया कि हर अनपढ़ व्यक्ति को साक्षर बनाना है। तभी से आज तक लगातार कारवां बढ़ता गया। संस्था किरतान, खारियां, मात्रश्याम, शाहपुर, लुदास, मींगनी खेड़ा, सलेमगढ़, सीसवाला, ढाणी महोबतपुर, ढाणी दरियापुर, आजाद नगर, गंगवा में अभियान चला चुके हैं। संवाद
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मन में अगर कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो दुनिया की कोई परेशानी हमें रोक नहीं सकती। व्हील चेयर पर होने के बाद भी मेरे हौसले कम नहीं हुए हैं। किसी अंग को खो देने से खराब है अपना हौसला खो देना। अगर हमारा हौसला हो तो हम हर काम कर सकते हैं। दिल में एक जज्बा होना चाहिए। - प्यारेलाल, संयोजक, ईच वन टीच एन संस्था
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