एक निजी अस्पताल में भर्ती किए गए मरीज को चिकित्सकों ने मुर्दा घोषित कर दिया। बिलखते परिजनों ने सांस चलती देखी तो सीनियर डाॅक्टर से जांच की मांग करने लगे। मरीज का दिल धड़क रहा है जिस पर मरीज उसे मृत मानने को तैयार नहीं। चिकित्सकों ने उसे ब्रेन डेड घोषित किया है।
जानकारी के अनुसार गांव इंदाछोई निवासी 44 वर्षीय रामदास गांव गुल्लरवाला में एएलएम के पद पर कार्यरत है। दोपहर को बिजलीघर में किसी कार्य के लिए टोहाना आ रहा था। इस दौरान जब वह आगे चल रहे ट्रैक्टर-ट्राॅली को क्रॉस करने लगा तो पीछे से अचानक एक कार के आने से उसकी बाइक का संतुलन बिगड़ गया और वह सड़क पर दूर जा गिरा।
उसे गंभीर चोटें आईं। राहगीरों ने उसे नागरिक अस्पताल में भर्ती करवाया, जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर हालत में उसे अग्रोहा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया लेकिन परिजन उसे हिसार के एक निजी अस्पताल में ले गए। निजी अस्पताल के आपातकालीन कक्ष में तैनात डाॅक्टरों ने जल्दबाजी में लाइनमैन को मृत घोषित कर दिया, जिससे परिजनों में हाहाकार मच गया।
परिजनों ने मरीज का दिल धड़कता हुआ देखा तो मरीज के जिंदा होने की बात कहते हुए सीनियर डॉक्टर से जांच की बात कहने लगे। सीनियर डॉक्टर ने आकर जांच की। चिकित्सकों ने कहा कि मरीज ब्रेन डेड हो चुका है। उसके बचने के कोई चांस नहीं है। केवल उसका दिल धड़क रहा है। अगर परिजन चाहें तो किसी को हार्ट डोनेट कर सकते हैं। लेकिन परिजन चिकित्सकों की बात मानने को तैयार नहीं।
मरीज ब्रेन डेड हो चुका है। ब्रेन डेड वह कंडीशन होती है जब मरीज की मौत हो जाती है। उसके शरीर एक हिस्सा काम करता रहता है। इस मरीज का केवल हार्ट काम कर रहा है। अन्य हिस्से पूरी तरह से बंद हो चुके हैं। मरीज के परिजनों को समझा दिया गया है। अब बचने के कोई चांस नहीं ।
डॉ. उमेश कालडा, अस्पताल संचालक, हिसार
हमारे पास रामदास की मौत की सूचना आई थी। हम डेड बाॅडी लेने पहुंचे तो मरीज को आईसीयू में बताया गया। अभी पोस्टमार्टम नहीं कराया गया। मरीज के परिजन जिंदा होने की बात कह रहे हैं।
दिनेश कुमार, थाना प्रभारी, रतिया, फतेहाबाद