डॉ. मोहन भागवत ने बकरी और शेर की कहानी सुनाते हुए कहा कि अपने परिचय का बहुत महत्व होता है। शेर को खुद का परिचय न हो तो वह भी बकरियों के साथ रहकर बकरी जैसा व्यवहार करने लगता है। उसे खुद का परिचय हो जाए तो वह शेर है। हमें अपने पराक्रम की जानकारी होनी चाहिए। अगर हम मानते हैं कि पराक्रमी पूर्वजों के वंशज है तो हम भी पराक्रमी बनेंगे। अगर मानेंगे कि हम मार खाते रहे हैं तो हम भी मार खाते रहेंगे।
योग गुरु स्वामी रामदेव ने कहा कि राष्ट्र धर्म, राष्ट्र हित सर्वोपरि है। इस विचार को संकल्प लेकर हमें आगे बढ़ना होगा। वीरता का शा स्वामी दयानंद के सपनों को पूरा करने के लिए काम करना होगा। मुगलों के खिलाफ पूरा अध्याय लिखने का साहस महर्षि दयानंद ने लिया। किसी में हिम्मत नहीं थी कि वह मुगलों के खिलाफ लाइन भी लिख दें। आज के समय में संयुक्त परिवार खत्म हो रहे हैं। खून के रिश्ते खून खून हो रहे हैं। वेद हमारे आचरण का आधार हैं। वेद के अनुसार चलाना हमारा धर्म है।