हिसार। वीडियो कांफ्रेंस और ऑनलाइन कक्षाओं के दौरान दुर्भावनापूर्ण वितरित की गई फाइलों से आमजन सावधान रहें। यह कहना है पुलिस अधीक्षक लोकेंद्र सिंह का। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी ने वीडियो कांफ्रेंस के जरिये होने वाली बैठकों और ऑनलाइन कक्षाओं में इजाफा किया है। जिसने साइबर सुरक्षा के बारे में हमारा ध्यान आकर्षित किया है। साइबर अपराधी सरकारी संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों और व्यवसाय के लिए वीडियो कांफ्रेंस के जरिये होने वाली वर्चुअल बैठकों को निशाना बनाते हैं। साइबर अपराधी लगातार साइबर अपराधों को अंजाम देने के लिए वीडियो कांफ्रेंस, ऑनलाइन कक्षाओं में गुप्त उपस्थिति के लिए नई नई तकनीक विकसित कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि साइबर अपराधी वीडियो कांफ्रेंस में शामिल होने वाले संगठन प्रतिभागियों से संबंधित ई-मेल एड्रेस के जरिये वर्चुअल बैठकों, कक्षाओं तक पहुंचते हैं। मीटिंग में शामिल होने के बाद साइबर अपराधी दुर्भावनापूर्ण निष्पादन योग्य फाइलों को एक संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज के रूप में छोड़ देते हैं ताकि उपयोगकर्ताओं को इसे खोलने, चलाने के लिए छल किया जा सके, जो आमतौर पर कुछ मैलवेयर प्रोग्राम, ट्रोजन, आदि होते हैं। स्थापना के बाद निष्पादन योग्य फाइल दुर्भावनापूर्ण गतिविधियों को शुरू करती है जो उपयोगकर्ता के सिस्टम और उपकरणों को विभिन्न मैलवेयर से ग्रसित करता है, जो साइबर अपराधियों को उपयोगकर्ता के सिस्टम को दूर से एक्सेस करने की अनुमति देता है।
ऑनलाइन शिक्षा छात्रों और शिक्षकों को साइबर सुरक्षा हमलों के प्रति अधिक संवेदनशील बनाती है। असुरक्षित वीडियो कांफ्रेंस अनाधिकृत उपयोगकर्ताओं जैसे मौखिक उत्पीड़न, आपत्तिजनक भाषा का उपयोग और अश्लील सामग्री प्रदर्शित करने से बाधित होती हैं। उपयोगकर्ता को दुर्भावनापूर्ण अटेचमेंट डाउनलोड करवाने या दुर्भावनापूर्ण लिंक खोलने के लिए समान दिखाई देने वाली स्कूल वेबसाइटें बनाई जाती हैं।
वर्चुअल मीटिंग और कक्षाओं से पहले भेजे गए लिंक के स्रोत की जांच करें। बैठक करवाने वाले यह भी जानकारी रखें कि बैठक में कौन शामिल हो रहा है। यह सुनिश्चित करें कि केवल अधिकृत सदस्य ही बैठक में भाग लें, इसके लिए पासवर्ड का ऑप्शन भी रखें। सरकारी अधिकारी सीडीएसी, सीडीओटी और एनआईसी द्वारा विकसित वीडियो कांफ्रेंस टूल का उपयोग करें। सार्वजनिक मंचों पर बैठक का विवरण साझा करने से बचें।