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बच्ची की सांसें छीन रहा ‘मोटापा’

Mon, 03 Nov 2014 12:17 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार
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दस साल की निशा चार साल पहले स्कूल जाती थी। नटखट बच्चे की तरह वह भी खूब मस्ती करती और घर के आंगन को खुशियों से भर देती थी।
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आज उसकी हालत ऐसी है कि सब कुछ छूट गया। स्कूल जाना तो दूर की बात है, उसके लिए खुद के सहारे चल पाना भी मुश्किल हो गया है।

मिलगेट एरिया के शिव नगर में रहने वाली निशा की यही हालत है। पूरे शरीर में अचानक सूजन आ जाती है। शरीर में दर्द होने लगता है।

पिता पवन मजदूरी करते हैं और मां सुषमा घर पर रहती है। करीब चार-पांच साल पहले बेटा खो चुकी मां की दिमागी हालत खराब है।

बताया जा रहा है कि बेटे की भी इसी बीमारी से मौत हो गई थी। परिजनों को डर है कि बेटी भी कहीं बेटे की तरह मौत के मुंह में न चली जाए।

डॉक्टरों की समझ से परे है बीमारी
आजाद हिंद युवा संगठन के सचिव विकास शर्मा का कहना है कि मजदूर पिता उसे कई अस्पतालों में दिखा चुके हैं। डॉक्टरों ने आरंभ में बच्ची को पेट में इंफेक्शन बताया था।
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इसके बाद यह बीमारी बढ़ती गई। करीब ढाई साल पहले शुरू हुई बीमारी इतनी बढ़ गई कि अब बच्ची खुद चलने-फिरने में भी लाचार है।

पिता पवन ने बताया कि आजाद हिंद युवा क्लब के माध्यम से उन्हें चंदे के 8770 रुपये आर्थिक सहायता मिली। निशा को वे इलाज के लिए शहर के एक निजी अस्पताल लेकर गए।
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इन रुपयों से उसका कुछ समय तो इलाज चला, लेकिन इसके बाद रुपये न होने पर वह भी रुक गया।
 
भाई भी जा चुकी है जान
पिता पवन का कहना है कि वे पिछले 13 साल से किराये के मकान में रह रहे हैं। निशा के बड़े भाई विक्रम को भी इसी तरह की बीमारी थी।

उसकी इस बीमारी ने जान ले ली है। निशा का एक और मझला भाई करण है, जो फिलहाल ठीक है। पवन का कहना है कि मकान मालिक उसकी कुछ सहायता कर रहे हैं।
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