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Hisar News: यूपीएससी की इंजीनियरिंग सर्विस एग्जाम अशोक कुमार को दूसरा रैंक

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अशोक कुमार
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हिसार। गांव मुकलान निवासी अशोक कुमार ने यूपीएससी की इंजीनियरिंग सर्विस एग्जाम (ईएसई) में देशभर में दूसरी रैंक हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है। खास बात यह रही कि यह परिणाम उनकी शादी के अगले ही दिन आया, जिससे परिवार की खुशी दोगुनी हो गई। रेलवे द्वारा इंजीनियरिंग पदों को ईएसई के माध्यम से भरने का फैसला किए जाने के बाद अशोक ने रेलवे इंजीनियरिंग सर्विस में जाने के लिए दोबारा यह परीक्षा दी थी।
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अमर उजाला से बातचीत में अशोक कुमार ने बताया कि वह वर्तमान में दिल्ली में सेंट्रल पावर इंजीनियरिंग सर्विस में असिस्टेंट डायरेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। इससे पहले वर्ष 2023 में उन्होंने इसी परीक्षा में चौथी रैंक हासिल की थी, जबकि 2022 में दसवीं रैंक प्राप्त की थी। दसवीं रैंक पर मनपसंद विभाग न मिलने के कारण उन्होंने फिर से परीक्षा दी थी। दूसरी रैंक के आधार पर अब उन्हें रेलवे में असिस्टेंट डायरेक्टर का पद मिलने की संभावना है।

अशोक ने बताया कि मंगलवार को गांव किरमारा में उनकी शादी हुई थी। बुधवार शाम करीब साढ़े सात बजे परिणाम घोषित हुआ, जिससे परिवार में उत्साह का माहौल बन गया। उन्होंने बताया कि पहले उन्हें उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में पीडब्ल्यूडी बीएंडआर विभाग में एसडीओ के पद पर नियुक्ति मिली थी। 2023 में चौथी रैंक आने के बाद दिल्ली में सेंट्रल पावर इंजीनियरिंग सर्विस में असिस्टेंट डायरेक्टर बने।
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साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले अशोक कुमार ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और शिक्षकों को दिया। उन्होंने दसवीं तक पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल से की, 12वीं सरसौद के सनराइज स्कूल से उत्तीर्ण की और वर्ष 2019 में फरीदाबाद स्थित वाईएमसीए कॉलेज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री ली। शुरुआत में उन्होंने गांव किरमारा में मौसी के घर रहकर तैयारी की।

अशोक ने बताया कि वर्ष 2020 में भाभा ऑटोमिक रिसर्च सेंटर में साइंटिस्ट की नौकरी मिली थी, लेकिन लक्ष्य पावर इंजीनियरिंग होने के कारण उन्होंने नौकरी छोड़कर पीडब्ल्यूडी में एसडीओ के रूप में कार्य किया और तैयारी जारी रखी। परीक्षा की तैयारी के लिए वह सुबह चार बजे पढ़ाई शुरू करते थे और छुट्टी के दिनों में 16 घंटे तक अध्ययन करते थे।

अशोक कुमार ने बताया कि दिल्ली में सेंट्रल पावर इंजीनियरिंग सर्विस में असिस्टेंट डायरेक्टर बनने के बाद उन्होंने पढ़ाई लगभग छोड़ दी थी। पिछले साल रेलवे द्वारा इंजीनियरिंग पदों को ईएसई से भरने का निर्णय लिया गया तो उन्होंने फिर से परीक्षा देने का फैसला किया। इस बार अधिक नई तैयारी नहीं की, बल्कि पहले पढ़े गए पाठ्यक्रमों को ही दोहराया।
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