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नाराज शिक्षकों ने कुलपति कार्यालय पर धरना दिया

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गुरू जंभेश्वर विश्वविद्यालय में वीसी ऑफिस के सामने धरने पर बैठे जीजेयू के शिक्षक संघ के सदस्य। - फोटो : Hisar
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हिसार। गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ ने कुलपति को दिए 24 घंटे का अल्टीमेटम शुक्रवार को समाप्त होने के बाद वीसी कार्यालय के बाहर धरना दिया। अपनी मांग पूरी न होने के विरोध में कुलपति के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। धरने पर बैठे शिक्षकों ने कहा कि कुलपति विश्वविद्यालय के नियमों को ताक पर रखकर मुद्दों पर चालबाजी करके शिक्षकों को गुमराह कर रहे हैं।
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शिक्षक संघ के प्रधान प्रोफेसर ऋषिपाल सिंह ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा शिक्षकों की मांगों को पूरा करने की समय सीमा समाप्त होने के बाद एक पत्र फैकल्टी ब्रांच के माध्यम से लीक किया गया। यह पत्र शिक्षक संघ के प्रधान को चिह्नित था। यह पत्र प्रधान को देने के बजाय विश्वविद्यालय के अधिकारियों के व्हाट्सएप ग्रुप में डाला गया। प्रोफेसर ऋषिपाल ने जीजेयू प्रशासन की इस तरह की हरकत को बेहद गैर जिम्मेदाराना बताया है। उन्होंने कहा कि जारी किए पत्र में कुछ मुद्दों पर एकतरफा फैसले लिए गए हैं, जो कि शिक्षकों को पूरी तरह से नामंजूर हैं। प्रधान ने बताया कि इस बार विश्वविद्यालय के सभी शिक्षक अपनी मांगों को लेकर एकजुट हैं और वे अपना विरोध प्रदर्शन तब तक जारी रखेंगे, जब तक कि उनकी सभी मांगें पूरी नहीं हो जाती। शिक्षकों की कुछ मांगों को पूरा किए जाने में विलंब के कारण शिक्षकों को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
शिक्षकों के धरने के दौरान एचफक्टो के प्रेसिडेंट प्रोफेसर विकास सिवाच समर्थन देने पहुंचे। उन्होंने कहा कि कुलपति की मनमानी की शिकायतें जीजेयू एवं एचएयू के शिक्षकों द्वारा मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि कुलपति को जीजेयू के अतिरिक्त कार्यभार से तुरंत हटाया जाए और जीजेयू में स्थायी कुलपति की नियुक्ति की जाए। इस मौके पर विश्वविद्यालय के लगभग 100 शिक्षकों ने सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक अपने सभी काम स्थगित करके धरना दिया।
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ये हैं गजूटा की प्रमुख मांग
-शिक्षकों को जून महीने में ग्रीष्मकालीन अवकाश दिया जाए।
-ग्रीष्मकालीन अवकाश न दिए जाने की एवज में अर्न लीव दी जाए।
-प्रशासन द्वारा छुट्टी लेने से पहले अप्रूवल लेने को बाध्य करने वाला पत्र वापस लिया जाए।
-पीएचडी थीसिस जांचने के लिए एक्सपर्ट्स नियुक्त करने के फरमान को वापस लिया जाए।
-शिक्षकों की पदोन्नति पर लगाई गई रोक हटाई जाए।
-जीजेयू के कुलपति का अतिरिक्त कार्यभार मुक्त किया जाए।
-जीजेयू में स्थायी कुलपति नियुक्त किया जाए।
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