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‘तमिलनाडु की तर्ज पर जाट समाज को आरक्षण दे सरकार’

Fri, 06 Nov 2015 12:37 AM IST
अमर उजाला हिसार/ब्यूरो
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तमिलनाडु की तर्ज पर आरक्षण देने की मांग को लेकर अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के सदस्यों ने वीरवार को विरोध मार्च निकाला।
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लघु सचिवालय पहुंचकर सीएम के नाम प्रेषित ज्ञापन सौंपने से पहले क्रांतिमान पार्क में बैठक आयोजित की गई।

अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति युवा विंग के सदस्यों ने क्रांतिमान पार्क में रैली का आयोजन किया।

इस मौके पर युवाओं ने एलान करते हुए कहा कि जाट समाज को आरक्षण नहीं दिया गया तो समाज के युवा आंदोलन को मजबूर होंगे।

जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेश प्रवक्ता रामभगत मलिक ने कहा कि केंद्र सरकार जाट समाज के साथ खिलवाड़ कर रही है।

95 प्रतिशत जाट खेती बाडी से जुड़े हैं। इसके बावजूद इन्हें बार-बार आरक्षण दायरे से बाहर रखा जा रहा है।

1991 में गुरनाम आयोग की रिपोर्ट पर अहीर, गुर्जर, जाट, मेव, रोड, सैनी, तथा त्यागी को 1995 में आरक्षण मिला तो तत्कालीनसीएम भजनलाल ने चार जातियों का आरक्षण रद कर दिया, जिसमें जाट भी शामिल थे।

24 जनवरी 2013 को हरियाणा सरकार ने जाट, रोड, त्यागी, बिश्नोई को आरक्षण दिया। प्रदेश सरकार ने इसे रद कर दिया।

4 मार्च 2014 को केंद्र सरकार ने जाटों को ओबीसी में शामिल किया। सुप्रीम कोर्ट ने 17 मार्च 2015 को इसे रद कर दिया। 26 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आरक्षण बहाली का आश्वासन दिया था।
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जाट आरक्षण संघर्ष समिति की प्रदेश अध्यक्ष निर्मला दहिया ने कि कहा कि तमिलनाडु की तर्ज पर हरियाणा विधानसभा में कानून पारित कर जाट व अन्य जातियों को आरक्षण प्रदान किया जाए।

जाट समाज के लोगों को ओबीसी कोटे में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से तीन चार महीने पहले नौकरी ले चुके युवाओं को भी नौकरी से हटा दिया गया।

रैली को राहुल मय्यड़, कुलदीप बेरवाल, सुखबीर श्योराण, मोहन पहलवान, सन्नी दहिया, सोनू कुहाड आदि ने भी संबोधित किया।
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