हिसार। एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की टीम ने अक्तूबर महीने में सेक्टर 1-4 में गांव लितानी निवासी रिछपाल को 5.80 लाख की रुपये की रिश्वत लेने के मामले की स्टेटस रिपोर्ट अदालत में पेश की। रिपोर्ट में कहा गया कि नामजद आरोपी सिपाही अजय और बिचौलिया रमेश ढाका जांच में शामिल नहीं हुए। दोनों के घरों पर छापा भी मारा, मगर दोनों फरार हैं। दोनों के परिजनों को नोटिस भी दिए गए हैं। एसीबी ने इस मामले में सीआईए-2 इंचार्ज कपिल सिहाग, सिपाही अजय, बिचौलिया लितानी निवासी रिछपाल व अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया था।
एसीबी ने मामले में नामजद आरोपी सिपाही अजय और भैरी अकबपुर निवासी बिचौलिये रमेश ढका को जांच में शामिल करने के प्रयास किए। जांच में पाया गया कि सिपाही अजय को 25 अक्तूबर को गुरुग्राम एसटीएफ पुलिस लाइन में रवाना किया गया था। एसीबी ने एसटीएफ को पत्राचार कर सिपाही अजय के बारे में पूछा। 2 दिसंबर को एसटीएफ की तरफ से पता चला कि सिपाही अजय ने वहां रिपोर्ट नहीं की है और ना अपनी तैनाती पर उपस्थित हुआ। इसके बाद टीम मुंढाल गई, लेकिन वहां आरोपी नहीं मिला। उसका परिवार सेक्टर-13 में किराये के मकान में रहता है। वहीं आरोपी रमेश ढाका को जांच में शामिल करने के लिए भैरी गांव में छापा मारा, लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ।
यह था मामला
उकलाना निवासी अमन को सीआईए-2 ने पिछले सप्ताह चोरी की गाड़ियों के मामले में पकड़ा था। रिछपाल ने मध्यस्थता करते हुए उसे उसी दिन छुड़ा लिया। आरोप है कि रिछपाल के जरिये सीआईए-2 ने अमन से रिश्वत के तौर पर रुपये मांगे। इस दौरान 17.50 लाख रुपये देने पर सहमति बनी। बाद में अमन ने पैसे देने से इन्कार कर दिया। सीआईए-2 की तरफ से उस पर दबाव बनाया गया तो उसने एंटी करप्शन मुख्यालय पंचकूला में शिकायत कर दी। उसने बताया कि उसे छोड़ने की एवज में सीआईए-2 में तैनात इंस्पेक्टर कपिल सिहाग, कांस्टेबल अजय व रमेश ढाका उससे 17.50 लाख रुपये मांग रहे हैं। इसके बाद रिछपाल को 5.80 लाख रुपये लेते रंगे हाथ पकड़ा था।