भाजपा का जातीय समीकरण का गणित यहां गड़बड़ा रहा है। ऐसे में वह विकास के नाम पर यहां रण में है। भाजपा हांसी को पुलिस जिला बनाने का क्रेडिट लेते हुए पहली कलम से हांसी को जिला बनाने का चुनावी वादा कर रही है। कांग्रेस भी विकास के मुद्दे पर ही घेर रही है। कांग्रेस बड़े उद्योग स्थापित न होना, बेरोजगारी, बेसहारा पशु, कानून व्यवस्था, शहर में जलभराव, सीवरेज व्यवस्था के मुद्दे पर भाजपा को घेरने का प्रयास कर रही है। 2019 के चुनाव में भाजपा का 75 पार का नारा जबरदस्त तरीके से चल रहा था, इस बार ऐसा नहीं है। ऐसे में विनोद भयाना सीट बचाने के लिए पूरा जोर लगाए हुए हैं तो दूसरी ओर कांग्रेस के राहुल मक्कड़ उनसे सीट छीनने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं।
जातीय समीकरणों के हिसाब से हांसी हलका जाट बहुल है। इस सीट पर कुल 2 लाख 3 हजार मतदाता हैं। जिसमें 65 हजार शहरी तथा बाकी ग्रामीण मतदाता है। करीब 67 हजार जाट व 20 हजार पंजाबी मतदाता है। इसके बावजूद यहां जाट प्रत्याशी केवल एक बार ही जीता है। दानवीर सेठ छाजुराम के पोते पीके चौधरी 1987 में भाजपा से विधायक बने थे। उनके बाद कोई भी जाट नेता इस सीट से जीत दर्ज नहीं कर पाया।
साल पार्टी प्रत्याशी वोट मिले
2019 भाजपा विनोद भ्याना 53191
2014 हजकां रेणुका बिश्नोई 46335
2009 हजकां विनोद भ्याना 36522