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सहेली के हाथ में देख स्वयं उठाई हॉकी, अब नेशनल लेवल पर चमका रही नाम

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हिसार। यदि मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो कोई भी उपलब्धि हासिल की जा सकती है, लेकिन कई बार दूसरों से ली गई प्रेरणा हमारा भविष्य संवार देती है। ऐसा ही उदाहरण साई टीम में कैप्टन और ओडिशा के गांव कुकड़ा की रहने वाली सुजाना कुजुर का है। सुजाना हिसार में चल रही सब जूनियर नेशनल वुमन हॉकी प्रतियोगिता में खेलने आई है। इस दौरान उन्होंने अमर उजाला से बातचीत कर अपने अनुभव साझा किए। हॉल ही में क्वार्टर फाइनल मैच में बेस्ट प्रदर्शन करने पर मैन ऑफ द मैच का पुरस्कार भी जीत चुकी हैं। साथ ही उसे हॉकी देकर सम्मानित किया गया।
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ढाई साल पहले की बात है। एक दिन सुजाता ने अपने गांव कुकड़ा में अपनी सहेली अनूपा को हॉकी खेलते देखा। उस समय उसके मन में विचार आया कि क्या वह भी हॉकी की प्लेयर बन सकती है। उसके बाद सुजाता ने अपने पिता दीना और माता प्रतिमा से खेलने की इच्छा जाहिर की। उनकी परमिशन मिलने पर सुजाता ने हॉकी खेलने का अभ्यास शुरू कर दिया। आज वह नेशनल लेवल पर अपना ही नहीं टीम का भी नाम रोशन कर रही है, वहीं उसकी सहेली अनूपा इंटरनेशनल लेवल पर खेल रही है।

सहेली की तरह इंटरनेशनल लेवल पर चमकाऊंगी नाम
सुजाता ने बातचीत में बताया, उसका सपना है कि वह भी अपनी सहेली अनूपा की तरह इंटरनेशनल लेवल पर देश का नाम रोशन करे। इसके लिए वह सुबह-शाम मैदान में पसीना बहाती है। वह उड़ीसा के साई के हॉस्टल में रहती है। माता-पिता खेत में काम कर परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं। सुजाता टीम कैप्टन के साथ सेंटर हॉफ भी खेलती है।
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आगे बढ़ाने के लिए माता-पिता का रहा सहयोग
सुजाता ने ढाई साल पहले हॉकी खेलना शुरू किया था। उसका कहना है कि आज वह अपने माता-पिता के सहयोग के कारण ही इस लेवल पर पहुंच पाई है। शुक्रवार को उनकी टीम का झारखंड के साथ मैच हुआ, लेकिन टीम हार गई। सुजाता ने बताया कि टीम में हार-जीत तो चलती रहती है। इस प्रतियोगिता से काफी कुछ सीखने को भी मिला है।
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