कॉलोनाइजर एरिया में दोहरे टैक्स पर सोमवार को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई, जिसमें हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण व दो कॉलोनाइजरों ने अपना जवाब दायर किया। अदालत ने इस मामले में सभी पक्षों को 20 जनवरी तक अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।
कॉलोनाइजर एरिया को टेकओवर किए बिना ही नगर निगम की ओर से प्रॉपर्टी टैक्स वसूलने के मुद्दे पर गुड़गांव सिटीजन काउंसिल ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की हुई है, जिस पर सोमवार को हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की ओर से जवाब दायर किया गया। इस मामले में प्रतिवादी बनाए गए दो बिल्डरों यूनिटेक व मालिबु टाउन की ओर से भी जवाब दिया गया।
गुड़गांव सिटीजन काउंसिल ने इस मामले में सरकारी विभागों व कॉलोनाइजर सहित 15 लोगों को प्रतिवादी बनाया है। इस मामले में हरियाणा सरकार, नगर योजनाकार, नगर निगम व दो कॉलोनाइजरों की ओर से नवंबर में जवाब दिया गया था। अब तक कुल 8 प्रतिवादियों की ओर से जवाब दिया गया है।
अदालत ने शेष 7 प्रतिवादियों को जवाब देने के लिए 20 नवंबर तक का समय दिया है। अगली सुनवाई 20 जनवरी को होगी। जीसीसी के अध्यक्ष आरएस राठी ने कहा कि अदालत का फैसला कॉलोनाइजर एरिया में रहने वाले करीब तीन लाख लोगों को राहत प्रदान करेगा।
नगर निगम की ओर से प्रॉपर्टी टैक्स वसूलने के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा है। कॉलोनाइजर एरिया को निगम ने अब तक टेकओवर नहीं किया है। इस कारण निगम इस एरिया में टैक्स वसूलने का अधिकार नहीं रखता।
कॉलोनाइजर एरिया के निवासी मेंटेनेंस टैक्स के नाम पर हर महीने कॉलोनाइजर को हजारों रुपये चुकाते हैं। ऐसे में निगम का प्रॉपर्टी टैक्स कानूनी तौर पर जायज नहीं है। जब तक केस का फैसला नहीं होगा, तब तक निगम को प्रॉपर्टी टैक्स नहीं देंगे।