हरियाणा सरकार ने वर्ष 2014-15 की कार्यक्रम क्रियान्वयन योजना के अंतर्गत स्वास्थ्य क्षेत्र के नए कार्यक्रमों के लिए लगभग 810 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को केंद्र सरकार के पास भेजा है।
यह जानकारी स्वास्थ्य मंत्री राव नरेंदर सिंह ने यहां जारी एक बयान में दी। उन्होंने बताया कि भेजे प्रस्ताव में राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन तथा मानसिक स्वास्थ्य, वृद्धावस्था देखभाल, तंबाकू नियंत्रण, कैंसर, मधुमेह, हृदय रोगों से
रोकथाम के लिए 188 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि केंद्र को भेजे प्रस्ताव में सिरसा, नारनौल, झज्जर और अंबाला में चार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य विंग, प्री-कन्सेप्शन केयर पैकेज, इंफेंट यंग चाइल्ड फीडिंग काउंसिलिंग सेंटर, कंगारू मदर केयर रूम, कुपोषण से बचाव के लिए कुपोषण पुनर्वास केंद्र, दस्त से बचाव के लिए डायरिया ट्रेनिंग एंड ट्रीटमेंट यूनिट्स, न्यू बॉर्न स्क्रीनिंग लैब स्थापित करने जैसे महत्वपूर्ण फैसले शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में 16 जिला शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र बनवाए गए हैं और 21 केंद्रों के लिए उपकरणों की खरीद की गई है। इसके अलावा, पांच मेडिकल मोबाइल यूनिट्स की खरीद भी की गई है।
उन्होंने बताया कि चालू वर्ष के दौरान प्रदेश के 11 जिलों में सब डिवीजन अस्पतालों तथा चिकित्सा महाविद्यालयों तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत एवं किशोर मित्र स्वास्थ्य क्लिनिक खोलने की योजना है।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ-साथ मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य देखभाल कार्यक्रमों को केंद्र बिंदु बनाया गया है।
राज्य के स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसूति कक्ष को आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित करते हुए शिशु के जन्म के दौरान दी जाने वाली देखभाल सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही है।
इसके अलावा, हरियाणा ऐसा पहला प्रदेश है, जिसने मातृ एवं शिशु को गर्भाधान पूर्व देखभाल सेवाएं देने के दृष्टिगत ‘प्री-कन्सेप्शन केयर पैकेज’ लागू किया है।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा चलाये जा रहे मातृ एवं शिशु देखभाल कार्यक्रमों के कारण प्रदेश के स्वास्थ्य सूचकांक में भी काफी सुधार देखने को मिला है।
वर्ष 2004-05 में मातृ मृत्यु दर 186 थी, जो घटकर 146 हो गई है। शिशु मृत्यु दर 61 से घटकर 42 पर आ गई है। कुल प्रजनन दर भी 3.0 से घटकर 2.3 हो गई है।
राज्य में संस्थागत प्रसूतियों को काफी प्रोत्साहित मिला है जो वर्ष 2004 में 23 प्रतिशत थी, अब बढ़कर 84.2 तक पहुंच गई है और अगले 2-3 वर्षों में संस्थागत प्रसूतियां की दर शत प्रतिशत हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।