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विधायकों-सांसदों को रियायती प्लाट देने मामले में सरकार ने मांगा समय

Thu, 08 May 2014 11:43 PM IST
अमर उजाला चंडीगढ़
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हरियाणा के 69 विधायकों और 10 सांसदों को मनसा देवी कांप्लेक्स पंचकूला में डेढ़ करोड़ रुपये मार्केट कीमत वाले प्लाट रियायती दर पर महज 28 लाख रुपये में अलाट करने की हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हु़डा) की स्कीम वापस लिए जाने पर हरियाणा सरकार अभी कोई फैसला नहीं ले पाई है।
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हर्लर्ड हाउस बिल्डिंग को-आपरेटिव सोसायटी ने याचिका दायर कर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट से हुडा की इस स्कीम पर रोक लगाने की मांग की थी।

इस मामले में जवाब तलबी में सरकार बैकफुट पर आ गई थी और सरकार ने हाईकोर्ट से कहा था कि इस स्कीम को वापस लेने पर विचार किया जा रहा है।

इसी मामले में वीरवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली दोहरी बेंच के समक्ष सरकार के वकील ने कहा कि अभी चुनाव अचार संहिता लागू है, लिहाजा स्कीम वापस लेने पर कोई फैसला नहीं हो पाया है।

इस मुद्दे पर हुडा अधिकारियों की मुख्यमंत्री से बैठक होनी थी, लेकिन अचार संहिता की वजह से बैठक नहीं हो सकी और इस मामले में फैसला अभी लंबित है।

इस दलील के साथ सरकार ने अदालत से और समय देने की मांग की। इसके बाद हाईकोर्ट ने सुनवाई 22 मई तक स्थगित करते हुए सरकारी वकील को हिदायत भी दी कि 22 मई तक कोई फैसला लेकर अदालत को सूचित करें।
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यह है मामला
हरियाणा के विधायकों और सांसदों को 14 मरले के प्लाट अलाट किए गए थे। इनकी मार्केट कीमत डेढ़ करोड़ के लगभग है और विधायकों व सांसदों को महज 28 लाख रुपए में अलाटमेंट किए जा रहे थे।

इसी स्कीम को याचिका के जरिए चुनौती दी गई। याचिका में कहा गया कि राजनेताओं और नौकरशाहों को रियायती दरों पर प्लाट्स दिए जा रहे हैं जबकि जरूरतमंद व्यक्तियों के लिए ऐसी योजनाएं नहीं हैं या फिऱ उन्हें इसका लाभ नहीं मिलता।

याचिका में यह भी कहा गया कि विधायकों और सांसदों के लिए पहले से ही फ्लैट्स हैं और उन्हें और भी कई तरह की सहूलियतें मिलती हैं।

ऐसे में इन्हें रियायती दरों पर प्लाट देना गलत है। इस मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार को फटकार भी लगाई थी और जानकारी तलब की थी कि विधायकों-सांसदों को क्या-क्या सहूलियतें दी जाती हैं।

सरकार ने एक शपथ पत्र द्वारा विधायकों और सांसदों को रिहायशी सहूलियतों के अलावा अन्य सहूलियतों की जानकारी भी दी थी।

इसी दौरान हाईकोर्ट ने कहा था कि आखिर राजनेताओं और अफसरशाही के लिए ही सारी सहूलियतें एवं रियायतें क्यों? आम व्यक्ति के लिए क्यों नहीं? सरकार ने हाईकोर्ट में आखिरकार यह कह दिया था कि इस मामले में योजना पर पुनर्विचार किया जा रहा है।
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