हरियाणा के पंद्रह हजार गेस्ट टीचरों को नियमित किए जाने से मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने साफ इनकार कर दिया है।
सोमवार शाम को मुख्यमंत्री के साथ गेस्ट टीचरों के 12 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की बैठक में मुख्यमंत्री ने कह दिया कि वे प्रदेश में गेस्ट टीचरों का न तो वेतन बढ़ाने जा रहे हैं और न ही उन्हें रेगुलर किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री और गेस्ट टीचरों के बीच यह बैठक रोहतक में लंबे आंदोलन के बाद तय हुई थी।
बैठक के बाद प्रतिनिधिमंडल के सदस्य राजेंद्र शास्त्री ने अमर उजाला को बताया कि एक घंटे चली बैठक में मुख्यमंत्री ने उनकी कोई मांग नहीं मानी।
इससे बातचीत टूट गई है। उन्होंने बताया कि गेस्ट टीचरों की मांग थी कि उन्हें काम करते हुए आठ साल हो गए हैं, इसलिए उन्हें रेगुलर किया जाए, लेकिन मुख्यमंत्री ने इससे साफ इनकार करते हुए कहा कि यह मामला बाद में देखा जाएगा।
गेस्ट टीचरों ने मांग रखी कि जब तक उन्हें रेगुलर नहीं किया जाता, तब तक उन्हें समान काम-समान वेतन फार्मूले के तहत रेगुलर टीचरों के बराबर वेतन दिया जाए।
इस पर करीब आधा घंटा बहस हुई। मुख्यमंत्री ने एक सदस्य को लताड़ते हुए कहा कि उनके वेतन में कुछ फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है।
एक अफसर ने यह बढ़ोतरी सिर्फ 2-3 फीसदी बताई। गेस्ट टीचरों ने बढ़ोतरी स्वीकार न करते हुए दलील दी कि ढाई साल पहले उनका मानदेय 20 फीसदी बढ़ाया गया था।
इस लिहाज से अब 50 फीसदी की बढ़ोतरी बनती है। उनके परिणाम बढ़िया हैं और पूरा काम कर रहे हैं।
मगर मुख्यमंत्री ने वेतन बढ़ाने की बात नहीं मानी और बातचीत टूट गई। उन्होंने बताया कि गेस्ट टीचरों ने मांग रखी कि जो बीए, बीएड टीचर प्राइमरी टीचर लगे हुए हैं उन्हें न हटाया जाए क्योंकि वे योग्यता पूरी करते हैं।
मुख्यमंत्री ने यह मांग भी स्वीकार नहीं की। गेस्ट टीचरों की मांग थी कि जिला स्तर पर जिला शिक्षा अधिकारी को एडजस्टमेंट का अधिकार दे दिया जाए।
मुख्यमंत्री के साथ शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल, मुख्य संसदीय सचिव राव दान सिंह, मुख्य सचिव पीके चौधरी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव एसएस ढिल्लों, डॉ. केके खंडेलवाल, मुख्यमंत्री के प्रिंसिपल ओएसडी एमएस चोपड़ा और अन्य अफसर उपस्थित थे।
गेस्ट टीचरों में अरुण मलिक, रणबीर सुहाग, कुलदीप, शिवचरण, नाजिर खान, अनुज, जयभगवान, सुभाष, सोनिया गिल, बिमला और अन्य शामिल थे।