‘ऑनर किलिंग पाप है। किसी भी खाप का ऑनर किलिंग से कोई संबंध नहीं है। खापों को कानूनी दर्जा नहीं है मगर उनकी सामाजिक मान्यता है।’
यह प्रतिक्रिया मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने शनिवार को चंडीगढ़ प्रेस क्लब में मीट द प्रेस कार्यक्रम में कई सवालों का जवाब देते हुए व्यक्त की।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘कोई भी खाप पंचायत ऑनर किलिंग नहीं करवाती। इसमें लड़का या लड़की के परिवार वाले या रिश्तेदार संलिप्त होते हैं। अगर कोई व्यक्ति ऐसी घटनाओं में संलिप्त होता है तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाती है। समाज में हमारी कुछ परंपराएं हैं। मैं बेशक मुख्यमंत्री हूं मगर सामाजिक व्यक्ति हूं। एक गोत्र में विवाह की सामाजिक परंपरा नहीं है। दक्षिण हरियाणा में बहन की बेटी के साथ शादी की परंपरा है, मगर हमारे समाज में यह परंपरा नहीं है। इसलिए खापों का सामाजिक महत्व है।’
मुख्यमंत्री से पूछा गया कि वे राजनीति के लिए खापों का इस्तेमाल करते हैं? सीएम ने जवाब दिया, ‘मैं खाप, जात और पात की नीति नहीं मानता हूं। मैं राजनीति के लिए सिर्फ कांग्रेस की नीति का इस्तेमाल करता हूं। जो भी व्यक्ति कानून अपने हाथ में लेगा, उसे दंड मिलेगा। कानून अपना काम करता है। उन्होंने कहा कि ऑनर किलिंग की घटनाएं केवल हरियाणा में नहीं, बल्कि पूरे देश में होती हैं। ऐसी घटनाओं के पीछे आमतौर पर लड़के या लड़की के परिवारवालों या रिश्तेदारों का हाथ होता है। इसलिए लोगों की मानसिकता को बदलने की आवश्यकता है। पुलिस ऐसे हर मामले में त्वरित कार्रवाई करती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हरियाणा में कानून व्यवस्था बेहतर है।’
हरियाणा में अनधिकृत कालोनियों को नियमित करने का रास्ता साफ
हरियाणा में अनधिकृत कालोनियों को नियमित करने का रास्ता साफ हो गया है। हाईकोर्ट ने नियमित करने पर लगाई रोक हटा ली है। यह जानकारी मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने शनिवार को यहां प्रेस क्लब में मीट द प्रेस कार्यक्रम में दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की अनधिकृत कालोनियों में बुनियादी सुविधाएं देने के लिए 26 सितंबर, 2013 से नया कानून लागू हो गया है। इससे 553 कालोनियों की10700 एकड़ में बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। हाईकोर्ट ने भी इन कालोनियों को नियमित करने पर लगी स्टे भी हटा ली है। मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. केके खंडेलवाल ने बताया कि स्टे हटने से अनधिकृत कालोनियों को नियमित करने का काम शुरू हो सकेगा। हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार का जवाब स्वीकार कर लिया है।
मुख्यमंत्री ने विपक्षी दल खासकर इनेलो नेताओं को चुनौती देते हुए कहा, ‘वे मीडिया में बयान देते हैं कि सरकार ने जमीन अधिग्रहण कर एसईजेड के लिए दी। मैं विपक्ष को चुनौती देता हूं कि वे साबित कर दें कि हमने एक इंच जमीन भी एसईजेड को अधिग्रहण कर दी हो तो मैं इस्तीफा दे दूंगा। मगर वे झूठ बोलना बंद करें। जहां तक रिलायंस का सवाल है उसे स्वैट इक्विटी में जमीन दी थी, उसे भी वापस लिया जा रहा है।’
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘2005 तक सिर्फ 24 शहरों में 99000 हेक्टेयर के डेवलपमेंट प्लान बनाए गए थे, जबकि हमने 55 शहरों में 1.93 लाख हेक्टेयर के डेवलपमेंट प्लान तैयार किए। इनेलो सरकार ने गुड़गांव में 68 फीसदी लाइसेंस या सीएलयू दिए जबकि हमारी सरकार ने सिर्फ 38 फीसदी दिए। शेष रतिया, टोहाना जैसे शहरों में दिए। इन छोटे शहरों में हमने 6663 एकड़ में सीएलयू दिए जबकि इनेलो सरकार ने सिर्फ 106 एकड़ में दिए थे। इनेलो सरकार में लाइसेंस से 662 करोड़ रुपये का राजस्व मिला था, जबकि हमारी सरकार में 10647 करोड़ रुपये का राजस्व मिला। इनेलो सरकार ने जमीन रिलीज की जमीन पर 39.7 फीसदी पर लाइसेंस दिए जबकि हमने 20,5 फीसदी पर दिए। विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं है और वे झूठ बोलते हैं।’
मंत्रिमंडल विस्तार के सवाल को बताया काल्पनिक
हरियाणा मंत्रिमंडल विस्तार के सवाल को मुख्यमंत्री ने काल्पनिक करार देकर अफवाहों को खत्म कर दिया। मुख्यमंत्री ने इस सवाल को बेहद हल्के में लिया और काल्पनिक बताकर हवा में उड़ा दिया।
पंजाब चंडीगढ़ भी हरियाणा को दे दे और पानी भी, मुद्दे खुद सुलझ जाएंगे
‘हरियाणा को चंडीगढ़ दे दो और अपने हिस्से का पानी भी। सारे मुद्दे अपने आप समाप्त हो जाएंगे।’ यह टिप्पणी मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने शनिवार को यहां प्रेस क्लब में मीट द प्रेस कार्यक्रम में अमर उजाला के सवाल पर व्यक्त की।
उनसे पूछा गया था कि पंजाब सरकार मुल्लांपुर में नए शहर का नाम न्यू चंडीगढ़ के नाम पर रखने पर हरियाणा ने आपत्ति जताई थी, मगर पंजाब ने उसे जारी रखा तो अब हरियाणा की क्या प्रतिक्रिया है? मुख्यमंत्री ने कहा कि चंडीगढ़ पर हरियाणा का हक है।
चंडीगढ़ हरियाणा को दे दो। हरियाणा को अपने हिस्से का पानी दे दो तो मुद्दे समाप्त हो जाएंगे। जब उनसे पूछा गया कि आपने चंडीगढ़ और पानी जैसे मुद्दे सुलझाने के लिए पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को बातचीत की पेशकश की थी तो क्या बात आगे बढ़ी? उन्होंने न्यू चंडीगढ़ नाम और बातचीत आगे बढ़ने के सवाल पर चुप्पी साध ली। अलबत्ता, चंडीगढ़ में हिस्सा मांगने के हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बयान पर सीएम हुड्डा ने कहा कि अभी तो चंडीगढ़ एक केंद्र शासित है। जब चंडीगढ़ हरियाणा का हो जाएगा तब हिमाचल प्रदेश से इस बारे में बात करे।
गौरतलब है कि मुल्लांपुर में बसाए जा रहे नए शहर का नाम न्यू चंडीगढ़ रखा है। मगर जिस जोर-शोर से मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने नामकरण का विरोध किया था, उतना ही विरोध पंजाब सरकार ने किया था। अब लगता है कि हरियाणा ने इस विवाद को छोड़ दिया है।