बजट अभिभाषण पर जब पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने उन पर तंज कसते हुए कहा कि गुरु गुड़ और चेला शक्कर हो गया। इस पर उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि मनोहर लाल ने तो पूरे हरियाणा की तस्वीर बदल दी। कई बार रघुबीर कादियान ने भी उनकी आलोचना की, लेकिन उन्हें दादा कहकर उनके तंज का कोई टेढ़ा जवाब नहीं दिया। हालांकि जब बीबी बत्रा ने यह कहा कि आपको जिस अधिकारी ने भाषण लिखकर दिया है तो इस पर वे थोड़ा गुस्सा हो गए थे। उन्होंने इसका जवाब देते हुए कहा कि गीता भुक्कल जब उनसे मिलने आई थी तो उस दौरान मैं अपना भाषण लिख रहा था।
सैनी ने हर विधायक के पूछे गए सवाल का जवाब विस्तार से दिया। यदि किसी विधायक ने बस अड्डे का भी सवाल पूछा था तो उसका भी उन्होंने सदन में जवाब दिया। वहीं, विपक्ष कुछ मुद्दों पर सरकार को बैकफुट पर लाने में कामयाब रही, मगर सैनी ने भुनाने का मौका नहीं दिया। रोहतक में पीर बोधी पर अतिक्रमण के मुद्दे पर सरकार ने पहले मना कर दिया था कि वहां पर कोई जोहड़ नहीं बना था।
जबकि विपक्ष कह रह था कि जोहड़ था। बाद में सरकार मान गई थी कि वहां जोहड़ा था। विपक्ष चाहती तो इस मुद्दे पर अपनी जीत भुना सकती थी। वहीं, 2009 में हुई इंस्पेक्टर भर्ती व दादूपुर नलवी के मुद़्दे पर भी सरकार ने उल्टा विपक्ष को घेर दिया। हाईकोर्ट ने कोई भर्ती रद्द नहीं की। यानी जो सलेक्शन हुए थे, उन्हें हाईकोर्ट की ओर से जस्टीफाई भी कर दिया गया। मगर सैनी ने सदन में इस मुद्दे पर विपक्ष को चक्रव्यूह में ऐसे फंसाया कि विपक्ष धराशायी हो गया।
सदन में नेता प्रतिपक्ष नहीं है। इससे माना जा रहा था कि विपक्ष कमजोर पड़ जाएगा। मगर कांग्रेस विधायकों को ऐसी कोई कमी खली नहीं। वे अपने मुद्दे को उठाने में कामयाब रहे हैं। वहीं, भूपेंद्र सिंह हुड्डा जब भी सदन में बोलने के लिए खड़े हुए, उन्हें किसी ने न तो रोका और न ही टोका। किसी भी कांग्रेस विधायक को जब भी कोई राय लेनी होती थी तो वह भूपेंद्र सिंह हुड्डा से ही लेते थे। वॉकआउट जैसे मुद्दों पर कांग्रेस विधायक एकजुट दिखे। वहीं, खुद सीएम सैनी भी उन्हें विपक्ष के नेता के तौर पर संबोधित करते रहे।