गुड़गांव। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एके सीकरी ने विद्यार्थियों से गरीब और निरक्षरों को उनके कानूनी अधिकारों के बारे में जानकारी देने का आह्वान किया। उन्हाेंने कहा कि ऐसा तबका जानकारी के अभाव में न्यायालय तक पहुंच नहीं पाते और न्याय से वंचित रह जाते हैं।
न्यायमूर्ति सीकरी शुक्रवार देर रात राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस के अवसर पर यहां के एमिटी स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि मूलभूत कानूनी प्रावधानों को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए, ताकि उन्हें मोटे तौर पर बेहतर समाज बनाने के लिए आवश्यक कानूनों और अधिकारों की जानकारी मिल सके। उन्हाेंने बताया कि इसके लिए एक छोटी सी पुस्तक प्रकाशित की जा रही है, जिसे शीघ्र ही स्कूलों में लागू किया जाएगा। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि किसी बच्चे या व्यक्ति के अधिकारों का हनन चाहे आपके घर में या पड़ोस में हो रहा हो तो आप उसके खिलाफ आवाज अवश्य उठाएं। उन्होंने रविंद्र नाथ टैगोर की एक कविता का उल्लेख करते हुए कहा कि दिनभर प्रकाश फैलाने के बाद सूर्य शाम को जब डूबता है, तो प्रकाश फैलाने का दायित्व एक छोटा सा मिट्टी का दीया अपने ऊपर लेता है, उसी प्रकार कानून की शिक्षा समाज में फैलाने के लिए बच्चों को विधिक सेवा प्राधिकरण के लिए दीये का काम करना है। उन्होंने सेक्टर-43 स्थित एमिटी इंटरनेशनल स्कूल परिसर में लीगल लिट्रेसी क्लब की शुरुआत की। इस दौरान अव्वल रही पोस्टर मेकिंग, क्ले मॉडलिंग, रंगोली आदि प्रदर्शित की गई थी। उन्होंने इन प्रतियोगिताओं के विजेता विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।
इससे पूर्व, हरियाणा विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष एसके मित्तल ने बताया कि राष्ट्रीय कानूनी मिशन का गठन वर्ष 2005 में हुआ था और उस समय से कानूनी साक्षरता फैलाने के नए-नए तरीके खोजे जा रहे हैं, लेकिन विद्यार्थियों को शामिल करके कानूनी साक्षरता क्लब खोलने से इस उद्देश्य को पूरा करने में काफी सफलता मिली है। हरियाणा विधिक सेवाएं प्राधिकरण के सचिव दीपक गुप्ता ने प्राधिकरण के उद्देश्यों की जानकारी दी। इस अवसर पर न्यायाधीश सतीश कुमार मित्तल, हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव दीपक गुप्ता आदि उपस्थित थे।