हरियाणा के सरकारी अस्पतालों में कांग्रेसी नेता और पूर्व विधायक ही इलाज के लिए धक्के खाने को मजबूर हैं। कांग्रेस के पूर्व विधायक हरिराम वाल्मीकि ने जिला अस्पताल के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वे दुलीना के पास हुई सड़क दुर्घटना में घायल हुए अपने बेटे और पोते का इलाज करवाने के लिए वीरवार रात लगभग दस बजे सरकारी अस्पताल में आए थे, लेकिन उन्हें वहां काफी देर तक कोई डॉक्टर नहीं मिला।
हरियाणा सरकार के मंत्रियों और उच्च अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद जाकर उनके 17 वर्षीय पोते सुमित व ड्राइवर हरीश का इलाज हो सका, वहीं डॉक्टरों ने उनके 40 वर्षीय बेटे सतीश वाल्मीकि को मृत घोषित कर दिया। पूर्व विधायक ने डॉक्टरों के इस रवैये की शिकायत शिक्षामंत्री गीता भुक्कल को भी की है, जिस पर उन्होंने जांच का आश्वासन दिया है।
यूं हुआ था हादसा
झज्जर-गुड़गांव मार्ग पर वीरवार रात लगभग साढ़े नौ बजे दुलीना के नजदीक कंटेनर और स्कॉर्पियो गाड़ी की टक्कर हो गई। इसमें पूर्व विधायक हरिराम वाल्मीकि के बेटे सतीश वाल्मीकि, पोता सुमित और ड्राइवर हरीश गंभीर रूप से घायल हो गए। दुघर्टना के बाद कंटेनर चालक मौके से फरार हो गया। घायलों को राहगीरों की मदद से झज्जर के सामान्य अस्पताल में भर्ती करवाया गया। जहां डॉक्टरों ने सतीश को मृत घोषित कर दिया। वहीं, सुमित और हरीश को पीजीआई रेफर किया गया है। पुलिस ने कंटेनर चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया है।
ये लगाए आरोप
पूर्व कांग्रेसी विधायक हरिराम वाल्मीकि ने जिला प्रशासन और अस्पताल स्टाफ पर काम में लापरवाही का आरोप लगाया है। वाल्मीकि का कहना है कि अस्पताल में न तो डॉक्टर हैं और न ही मूलभूत सुविधाएं। उन्होंने कहा कि वीरवार देर रात हुए हादसे के बाद जब वे लगभग दस बजे सरकारी अस्पताल पहुंचे, तब वहां डॉक्टर नहीं थे और न ही सीएमओ समेत कोई अधिकारी फोन उठा रहा था। डीसी का फोन भी स्विच ऑफ आ रहा था। तब उन्होंने शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल को फोन किया। उनके अधिकारियों के पास फोन करने के बाद डॉक्टर आए और इलाज शुरू हो पाया। उन्हें प्राइवेट अस्पताल में अपने पोते का एक्सरे करवाना पड़ा। इसमें काफी समय भी बर्बाद हुआ।
डिप्टी सीएमओ कुमुद शर्मा ने बताया कि जैसे ही मुझे सूचना मिली थी तुरंत अस्पताल में पहुंच गई थी। सतीश को मृत
अवस्था में ही अस्पताल में लाया गया था। डॉक्टर मौजूद थे और घायलों का इलाज
किया जा रहा था। घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद पीजीआई रोहतक रेफर किया
गया था और पीजीआई रोहतक भी फोन पर सूचित कर दिया गया था।
कांग्रेस के पूर्व विधायक हरिराम ने बताया कि सरकार
द्वारा करोड़ों की लागत से अस्पताल बनवाने का क्या फायदा है, जब इलाज ही न
हो पाए। जब पूर्व एमएलए के साथ ऐसा बर्ताव किया जा रहा है तब आमजन का क्या
होगा।