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यूं खत्म हुई 15 साल से हरियाणा में फैली दहशत

Tue, 01 Oct 2013 12:25 AM IST
रोहतक/ब्यूरो
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कलानौर-बौंद रोड पर सोमवार अलसुबह पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ के दौरान कुख्यात बदमाश और दो भाइयों की हत्या का आरोपी कोलबीर (30) मारा गया।
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पैरोल से फरार भगोड़े कोलबीर की भिवानी पुलिस को एक दर्जन से अधिक आपराधिक मामलों में तलाश थी और उस पर दो लाख रुपये का इनाम रखा गया था। इस दौरान कई राउंड फायरिंग दोनों ओर से की गई। बदमाश के पास से पुलिस को दो पिस्तौल और नौ कारतूस बरामद हुए। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए पीजीआई भेज दिया।

डॉक्टरों के एक पैनल द्वारा शव का पोस्टमार्टम कर परिजनों को सौंप दिया है। वहीं, आईजी अनिल राव और एसपी राजेश दुग्गल ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया और जवानों की पीठ थपथपाई।
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सोमवार तड़के तीन बजे आईजी अनिल राव के स्पेशल स्टाफ में तैनात उपनिरीक्षक आजाद सिंह को सूचना मिली कि चरखी दादरी का बौंद कलां निवासी बदमाश कोलबीर कलानौर-बौंद रोड स्थित खेतों में छिपा हुआ है। आजाद सिंह के नेतृत्व में पुलिस की एक टीम मौके पर पहुंची और वहां की घेराबंदी कर दी।

पुलिस टीम को देख कोलबीर ने फायरिंग शुरू कर दी, जिस पर पुलिसकर्मियों ने अपने बचाव में फायर किए। गोली लगने से कोलबीर की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के दौरान पुलिस टीम ने आला अधिकारियों को इस बारे में सूचना दी। आईजी अनिल राव और एसपी राजेश दुग्गल ने घटना स्थल का निरीक्षण किया।


चोरी से लेकर तीन की हत्या में वांछित था कोलबीर
भिवानी/चरखी दादरी। एक दशक से भी अधिक समय से पुलिस के लिए सिरदर्द बने मोस्ट वांटेड कोलबीर को रविवार रात कलानौर के समीप पुलिस ने मुठभेड़ में ढेर कर दिया।

बौंद कलां के इस बदमाश का खौफ क्षेत्रवासियों पर इस कद्र छाया था कि रात के समय उन्होंने खेतों में जाना छोड़ दिया था। दिन में भी खेतों में काम करने और घर से बाहर निकलने में लोगों को डर लगता था। दहशत का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि उसे पकड़ने के लिए पुलिस की 18 टीमों का गठन किया गया था। उस पर 13 मामले दर्ज थे।
 
दो सगे भाइयों की हत्या से दहला उठा था बौंद
मोस्ट वांटेड कोलबीर ने 14 नवंबर 2012 की रात दो सगे भाइयों कुलदीप और राजेंद्र को गोलियों से भून दिया था। दोनों खेत में पानी लगाने के लिए गए थे। इससे पहले उसी दिन कोलबीर खेतों में पानी लगा रहे किसान जयप्रकाश से उलझ गया था। किसी तरह बच बचाकर जयप्रकाश बौंदकलां पुलिस थाना पहुंचा था और पुलिस को कोलबीर के बारे में बताया था। जयप्रकाश के कहने के बाद भी पुलिस नहीं जागी थी। इसके बाद किसान जयप्रकाश ने कुलदीप और राजेंद्र के पिता हरपाल को यह सारी बात बताई थी।

गुस्साए लोगों ने लगा दी थी बौंद थाने को आग
दो सगे भाइयों की हत्या और पुलिस की लापरवाही से गुस्साए लोगों ने बौंदकलां थाने को आग लगा दी थी। डीएसपी की गाड़ी और पीसीआर को भी आग के हवाले कर दिया था। उस समय ग्रामीणों के पथराव में आठ पुलिस कर्मचारी भी घायल हो गए थे। ग्रामीणों ने कोलबीर के घर को भी आग लगा दी थी।


यूं बढ़ती गई दहशत
- 1998 में कोलबीर ने चोरी की वारदात से अपराध की दुनिया में कदम रखा
- 2002 में कोलबीर के साथ सुभाष उर्फ काला का गांव के ही कुछ लोगों के साथ झगड़ा हुआ था। इसका बदला लेने के लिए कोलबीर ने सुभाष के साथ मिलकर 28 अक्टूबर 2002 को गांव के ही हरिकेश की गोली मार कर हत्या कर दी थी। सुभाष उर्फ काला अप्रैल 2004 में पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था। 2005 में कोलबीर को उम्रकैद की सजा हो गई थी।
- 2006 में कोलबीर पैरोल पर जेल से बाहर आया और वापस जेल नहीं गया।
- 2010 में कोलबीर ने अपने चचेरे भाई पर जानलेवा हमला किया
- 03 दिसंबर 2011 को आईजी टीम के प्रभारी जीत सिंह पर फायरिंग की
- 30 जनवरी 2012 को बौंदकलां निवासी उदयवीर पर जानलेवा हमला किया
- 14 नवंबर 2012 को दो भाइयों कुलदीप और राजेंद्र की हत्या की
 
जेल में बंद हैं तीन और भाई
कोलबीर की बहन गुड्डी ने अदालत में पेश होकर जेल में बंद अपने तीन भाइयों के लिए कोलबीर के अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति मांगी। बौंदकलां हत्याकांड में कोलबीर के भाई पवनवीर, प्रवेश और नुकूल भी भिवानी जेल में बंद हैं। इसके अलावा उसके दो और भाई हैं, जो गांव में ही रहते हैं।

हत्यारे की मौत पर सुकून, पर वापस नहीं आ सकते बेटे
राजेंद्र सिंह और कुलदीप सिंह के पिता सूबेदार हरफूल सिंह ने कहा कि उनके बेटों के हत्यारे कोलबीर की मौत से उन्हें मानसिक शांति जरूर मिली है, लेकिन उनके बेटों की भरपाई नहीं हो सकती। मृतक के परिजनों ने पुलिस को बधाई देते हुए कहा कि इस सराहनीय कार्य से पूरे इलाके में शांति कायम होगी।
 
फोन और गाड़ी से दूर, खेतों में रहता था
रोहतक। बौंद थाना क्षेत्र में 1998 में चोरी की वारदात को अंजाम देने के बाद कोलबीर ने अपराध की दुनिया में कदम रखा। करीब 15 साल के दौरान कोलबीर का खौफ ग्रामीणों पर रहा। सबसे बड़ी बात तो यह थी कि कोलबीर न तो कोई फोन रखता था और न ही किसी वाहन में सफर करता था। वह खेतों में ही रहता था और वहीं से अपना नेटवर्क चलाता था।
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पेड़ पर सोता था, रोटियां छीनता था

बदमाश कोलबीर खेत में ही रहता था। खास बात तो यह थी कि वह पेड़ पर ही सो जाता था। वह गांव में भी नहीं आता था और किसानों के लिए लाई गई रोटियां वह रास्ते में ही छीन लेता था।

 
पुलिस टीम ने बड़ी बहादुरी से बदमाश कोलबीर को ढेर किया है। उन्हें बधाई। एरिया में किसी भी अपराधी को खौफ फैलाने नहीं दिया जाएगा।
- अनिल राव, आईजी, रोहतक रेंज
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