फतेहाबाद। चार माह से खाली पड़े जिला परिषद के खजाने को संजीवनी मिली है। जिला परिषद को 15वें वित्त आयोग की सवा दो करोड़ रुपये की ग्रांट मिली है। ग्रांट न होने के कारण जिला परिषद के सदस्य गांवों में काम न करवाने के कारण हाथों पर हाथ धरे बैठे थे, लेकिन अब गांवों में विकास की उम्मीद जगी है।
फतेहाबाद में जिला परिषद के करीब डेढ़ साल बाद 28 नवंबर को चुनाव हुए थे। रिजल्ट घोषित होने के बाद जिला परिषद के 18 सदस्य मनोनीत हुए और प्रधान पद पर सुमन खिचड़ काबिज हुई। हालांकि जिला परिषद के गठन के समय से ही जिला परिषद के हाथ खाली थे और उसके पास कोई बजट नहीं था। उम्मीद थी कि जिला परिषद के गठन के बाद ग्रांट आएगी, लेकिन चार माह बीत जाने के बाद ग्रांट भी नहीं आई। जिस कारण गांवों में अनेक काम अटके हुए हैं। सबसे बड़ी समस्या गांवों में पेयजल की है और हाल ही में गांव बरसीन में महिलाओं ने पेयजल किल्लत को लेकर मटका फोड़ प्रदर्शन भी किया था।
अब मिली सवा दो करोड़ रुपये की ग्रांट
जिला परिषद के पास अब 15वें वित्त आयोग की ओर से सवा दो करोड़ रुपये की ग्रांट भेजी गई है। इस ग्रांट का प्रयोग ग्रामीण क्षेत्रों में विकास व जिला परिषद कार्यालय के लिए किया जाएगा। यह ग्रांट हाल ही में जिला परिषद को मिली है, जिससे अब गांवों में कुछ विकास कार्य आरंभ होने की संभावना बन गई है।
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जिला परिषद के पास पहले कोई ग्रांट नहीं थी और नहीं जिला परिषद के पास पैसा था। अब ग्रांट आई है तो इसे ग्रामीण विकास के लिए प्रयोग किया जाएगा। सरकार की ओर से सवा दो करोड़ रुपये की ग्रांट हमें मिली है। जिसका सदुपयोग किया जाएगा।
-सुमन खिचड़, प्रधान जिला परिषद फतेहाबाद।
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15 वें वित्त आयोग की ओर से जिला परिषद को सवा दो करोड़ रुपये की ग्रांट मिली है। यह ग्रांट मार्च माह के अंत में आई थी। अब इसके प्रयोग के लिए जिला परिषद सदस्यों से बातचीत की जाएगी।
-कुलभूषण बंसल, सीआईओ, जिला परिषद।