फतेहाबाद। शहर में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे नागरिक परेशान हैं। अनुमान के मुताबिक शहर में करीब 6,000 आवारा कुत्ते हैं, जो गलियों और सड़कों पर घूमकर दहशत का माहौल बना रहे हैं। इन कुत्तों के कारण गली-मोहल्लों में बच्चों और बुजुर्गों के लिए काफी खतरनाक हो गया है। वहीं रात के समय ये लोगों की नींद खराब कर रहे हैं।
नागरिक अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार पिछले छह माह में कुत्तों ने 232 लोगों को काटा है। हालांकि कोई जानलेवा हादसा नहीं हुआ, लेकिन दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। अस्पताल में रोजाना करीब 15 से 20 लोग एंटी-रेबीज का इंजेक्शन लगवाने पहुंचते हैं। नगर परिषद ने शहर में आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के लिए बधियाकरण अभियान चलाया है। अब तक 2,130 कुत्तों का ही बधियाकरण और टीकाकरण किया गया है। एक कुत्ते का बधियाकरण व टीकाकरण निजी एजेंसी को 982 रुपये में कराया जाता है, लेकिन अभियान अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रहा है।
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आश्रय गृह की तैयारी
लोगों की परेशानियों को देखते हुए और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के पालन में, नगर परिषद अब आवारा कुत्तों के लिए आश्रय गृह बनाने के आदेश जारी किए हैं। इससे हिंसक और आक्रामक कुत्तों को सड़क से हटाकर पुनर्वासित करने में मदद मिल सकती है। वहीं आमजन को भी इनके काटे जाने का भय नहीं रहेगा।
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नगर परिषद को आवारा कुत्तों के बधियाकरण अभियान में तेजी लानी चाहिए। इसके ठेके पर खर्च हो रही राशि का सही उपयोग करना चाहिए। प्रशासन से मांग की है कि इस समस्या पर तुरंत ध्यान दिया जाए ताकि शहर में लोगों को इनके काटे जाने के डर दूर हो सके।
-राजकुमार।
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सुबह बच्चों को स्कूल छोड़ने निकलो तो सड़कों पर कुत्तों के झुंड दौड़ते मिलते हैं। कई बार ये साइकिल सवारों को काट चुके हैं। नगर परिषद को इन पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। ये कुत्ते बाइक के साथ भी दौड़ने लगते हैं, जिससे हादसे होने का खतरा बना रहता है।
-रवि उतरेजा।
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रात के समय गलियों में कुत्ते इतने बढ़ गए हैं कि बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। छोटे बच्चे डर के मारे खेलना छोड़ चुके हैं। इनके कारण गलियों में गंदगी फैल रही है। नगर परिषद को इनकी संख्या पर नियंत्रण के लिए बधियाकरण अभियान चलाना चाहिए।
-मोहनलाल नारंग, पार्षद।
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सुबह टहलने के लिए निकलते समय कुत्तों का डर बना रहता है। कुछ कुत्ते तो झुंड बनाकर पीछे पड़ जाते हैं। प्रशासन को इनका बधियाकरण अभियान तेज करना चाहिए। ताकि इनकी सख्या बढ़ने से रोका जा सके और लोग घर से बाहर निकलते समय न डरे।
-सौरभ।
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:: शहर में कुत्तों की नसबंदी का अभियान जारी है। पिछले छह महीनों में 2000 से अधिक कुत्तों की नसबंदी की गई है ताकि इनकी संख्या में बढ़ोतरी न हो। कुत्तों को पकड़कर उनकी नसबंदी करके वापिस उनके ही एरिया में छोड़ा जा रहा है।
-सतपाल सैनी, मुख्य सफाई निरीक्षक (सीएसआई)