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Fatehabad News: बड़ोपल में वन्य प्राणियों को मिलेगा प्राकृतिक अहसास, उगाई जाएगी घास, हटेंगे कंटीले पेड़

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फतेहाबाद के गांव बड़ोपल में खेतों में विचरण करते हिरण।
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फतेहाबाद। फतेहाबाद के गांव बड़ोपल में करीब 200 एकड़ जमीन पर खुले में विचरण करने वाले दुर्लभ प्रजाति के राज्य पशु काला हिरणों को अब प्राकृतिक एहसास मिलेगा। हिरणों को झुंड में व प्राकृतिक बड़ी घास के बीच रहना पसंद है, ऐसे में वन्य प्राणी विभाग यहां पर प्राकृतिक घास उगाएगा, ताकि उनको अपना प्राकृतिक वास मिल सके। इसके लिए वन्य प्राणी विभाग ने टेंडर भी जारी कर दिया है।
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फतेहाबाद के गांव बड़ोपल को वन्य प्राणी बहुल क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। इसके नजदीक ही गोरखपुर परमाणु संयंत्र का भी निर्माण हो रहा है। बिश्नोई बेल्ट का गांव होने के चलते बड़ोपल में लोग इन वन्य प्राणियों का लगातार संरक्षण करते आ रहे हैं। पहले यहां पर दुर्लभ प्रजाति के काले हिरण व हिरणों का शिकार होता रहता था, जिस पर बिश्नोई समाज के लोगों ने रोक लगाई हुई है। हिंसक कुत्तों से भी इन हिरणों को भय बना रहता है और कई बार खेतों के चारों ओर कंटीले तार लगे होने के कारण भी हिरण घायल होते रहते हैं, जिनको हिसार डियर पार्क में इलाज के लिए ले जाया जाता है। रेतीली भूमि होने के चलते इस स्थान पर कीकर व बकैण के पौधे उग आए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, हिरण स्वछंद रहने वाले प्राणी हैं और इनको खुला मैदान व घास अधिक पसंद रहती है। अब वन्य प्राणी विभाग ने इस क्षेत्र में काला हिरणों को उनका प्राकृतिक वास देने का निर्णय लिया है। इस क्षेत्र में कांग्रेस घास, सूरजमुखी घास और कई कंटीले पौधे व पेड़ हैं, जिनको हटाया जाएगा। साथ ही यहां पर प्राकृतिक घास उगाने को अहमियत दी जाएगी, ताकि हिरणों को उनकी पसंद का मूल वास मिल सके। वन्य प्राणी विभाग ने इसके लिए 5,34000 रुपये का टेंडर लगाया है।
काले हिरण की 250 से 300 है संख्या
ज्ञात रहे कि अकेले बड़ोपल क्षेत्र में करीब 250 से 300 के करीब काला हिरण हैं। बता दें कि राज्य पशु काला हिरण की सबसे अधिक संख्या बड़ोपल क्षेत्र में पाई जाती है। यहां पर बिश्नोई समाज ही इनकी रक्षा व देखरेख करता है। इस क्षेत्र में काला हिरण बिना डरे खुले में घूमते रहते हैं।
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लड़ी है लंबी लड़ाई
पीपुल्स फॉर इंडिया के जिला अध्यक्ष विनोद कड़वासरा ने बताया कि पहले क्षेत्र में काला हिरणों का शिकार होता रहा है और साथ ही वह कभी कंटीली तारों तथा कुत्तों का शिकार भी हो जाते थे। इनके संरक्षण को लेकर बिश्नोई समाज हमेशा से आगे रहा है। यहां पर काला हिरणों को उनका मूल प्रवास दिलवाने के लिए लंबे समय से मांग चल रही थी। पहले तो सरकार इसे नकारती रही, लेकिन आखिरकार अब उनकी मांग पूरी हुई है।
कोट

बड़ोपल में काला हिरणों को उनका मूल निवास व प्राकृतिक वास मिले, इसके लिए टेंडर जारी कर दिया गया है। कंटीली झाड़ियों व पेड़-पौधों को यहां से हटाकर प्राकृतिक घास लगाई जाएगी। साथ ही फलों के पेड़ भी लगाए जाएंगे, ताकि हिरणों को लगे कि वह अपने प्राकृतिक क्षेत्र में रह रहे हैं।
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-वीरेंद्र गोदारा, वन्य प्राणी अधिकारी, हिसार।
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