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अनलॉक हुआ बागवां, फिर भी घर से आ नहीं रहे बुजुर्ग

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करीब डेढ़ साल बाद खुला बागवां का गेट। - फोटो : Fatehabad
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फतेहाबाद। कोरोना काल के दौरान बंद हुए बागवां को अब खोल दिया गया है। मगर अब यहां पर बुजुर्ग नहीं आ रहे। करीब एक सप्ताह से इंतजार हो रहा है। बागवां की तरफ से कई बुजुर्गों को मैसेज भी भेजे गए हैं कि वे यहां पहले ही तरह आया करें, अखबार पढ़ें, टीवी देखें, बातें करते, लेकिन ज्यादातर बुजुर्गों की दिनचर्या बदल चुकी है। कोरोना काल में बुजुर्गों की आदतें बदल चुकी है। अब वे घर से नहीं निकलना चाहते। पूरा दिन घर में ही रहते हैं। यह अलग बात है कि सुबह-शाम आसपास के किसी पार्क में टहलने चले जाएं। महफिल में जाना उन्हें अच्छा नहीं लगता। इसके चलते बागवां परिसर खाली पड़ा है।
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बागवां शहर का एकमात्र वृद्ध आश्रम है। हालांकि, यहां पर कोई बुजुर्ग स्थायी तौर पर नहीं रहता। इसे डे-केयर के रूप में बनाया गया है। भारत विकास परिषद ने करीब दस साल पहले इस प्रोजेक्ट की शुरुआत की थी। उद्देश्य था कि जो बुजुर्ग पूरा दिन घर में बैठे बोर हो जाते हैं, वे यहां आराम फरमा सकें। कई घरों में माहौल अशांत होता है। ऐसे बुजुर्ग घर के कलह से दूर रह सकते हैं। उनके लिए बागवां एक आश्रम की तरह बनाया गया। यहां सुबह चाय व नाश्ते तथा दोपहर में लंच की व्यवस्था की जाती है। मनोरंजन के लिए टीवी है। अखबार पढ़ने की सुविधा भी है। साथ में कैरम आदि भी खेल सकते हैं। इस तरह एक तनाव मुक्त माहौल दिया जाता है। इसलिए यहां बुजुर्ग सुबह 10 बजे के आसपास आ जाते थे। शाम को घर लौट जाते थे। संवाद
लॉकडाउन से पहले आते थे 30 बुजुर्ग
मार्च 2020 में कोरोना के चलते लॉकडाउन लगा था। उससे पहले यहां पर लगभग 30 बुजुर्गों का आना जाना था। कोई सप्ताह में पांच दिन तो कोई तीन दिन आता था। लॉकडाउन के दौरान चेतावनी थी कि कोरोना महामारी बुजुर्गों के लिए बड़ा खतरा है। इसलिए बागवां को तत्काल बंद कर दिया गया था। उसके बाद यह बुजुर्गों के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया। बुजुर्गों ने खुद भी आना छोड़ दिया। बताया गया है कि उनमें से तीन-चार बुजुर्गों का डेढ़ साल में निधन भी हो चुका है।
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कोट
हमने बुजुर्गों से संपर्क किया है: चेयरमैन
करीब एक सप्ताह पहले हमने बागवां परिसर खोल दिया है। बुजुर्गों को भी मैसेज भिजवा दिया है कि वे यहां पहले की तरह आया करें। मगर अभी तक कोई नहीं आया। हालांकि अब बागवां परिसर दोपहर तक खुला रहता है।
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-बंटी ग्रोवर, प्रोजेक्ट चेयरमैन, बागवां।
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