ग्राम पंचायतों के बनने के बाद अब चौधरियों को सिंचाई विभाग ने भी झटका दे दिया है। गांवों से निकलने वाली नहरों व माइनरों के साथ जो पटरियां होती हैं, वह सिंचाई विभाग के अंतर्गत आती हैं। अगर यहां पर ग्राम पंचायतें किसी किसान के खेत में जाने के लिए इसे पक्का करती हैं, तो अब उनको एक लाख रुपये देकर ही विभाग से एनओसी लेनी होगी। पहले 10 हजार में यह काम हो जाता था।
सिंचाई विभाग की ओर से जो नहरें बनाई जाती हैं, उसके साथ ही लोगों के आने-जाने के लिए पटरियां भी बनाई जाती हैं। इन पटरियों के साथ ही किसानों के खेत लगे होते हैं और ग्राम पंचायतों पर कई बार यह दबाव बनता है कि मिट्टी वाली इन पटरियों को पक्का करवाया जाए, ताकि किसानों को अपने वाहनों पर आने जाने में कोई परेशानी न हो।
इसके लिए ग्राम पंचायतों को सिंचाई विभाग से इन पटरियों पर टाइलें बिछाने या इसे पक्का करने के लिए एनओसी लेनी पड़ती है। एनओसी मिलने के बाद ही ग्राम पंचायतें यहां पर नहर के साथ बनी मिट्टी की इन पटरियों को पक्का कर सकती हैं। ग्राम पंचायतों को यह एनओसी ग्राम पंचायत से होने वाली आमदनी से ही लेनी होती है। सरकारी बजट का प्रयोग इसके लिए नहीं किया जा सकता।
ग्राम पंचायताें को अपनी आमदनी से ही लेनी होती है एनओसी
पंचायती विभाग के अनुसार, पहले नहरी पटरी को पक्का करने के लिए ग्राम पंचायतों को सिर्फ पांच से 10 हजार रुपये देकर सिंचाई विभाग से एनओसी लेनी पड़ती थी। अब सिंचाई विभाग ने इसे बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दिया है। चूंकि ग्राम पंचायताें को अपने खुद की आमदनी से ही एनओसी लेनी पड़ती है। जिले में इस समय नहरों के मुख्य खंडों रतिया, टोहाना, जाखल व फतेहाबाद में बाढ़ आई थी, जिस कारण गांवों में ग्राम पंचायतों ने गांव के विकास व बाढ़ से गांवों को बचाने के प्रयासों में ग्राम पंचायतों का अपना खुद का बजट लगा दिया था। जिस कारण अब एक लाख रुपये देकर एनओसी लेना ग्राम पंचायतों के हाथ में नहीं है और नहरी पटरियों पर काम नहीं हो पा रहे हैं।
ज्ञात रहे कि किसानों को अपने खेतों में जाने के लिए नहर की कच्ची पटरियों से जाना पड़ता है, जिससे कई बार बारिश के दिनों में यह मिट्टी धंस जाती है और किसानों के वाहन भी धंस जाते हैं। इसके लिए ग्राम पंचायतें इन पटरियों को पक्का करने का जिम्मा लेती हैं, लेकिन सिंचाई विभाग ने एनओसी लेने के लिए फीस एक लाख रुपये करके ग्राम पंचायतों की मुसीबत बढ़ा दी है।
ग्राम पंचायतों को सिंचाई विभाग की पटरियों को पक्का करने के लिए पहले 10 हजार रुपये तक देकर एनओसी लेनी पड़ती थी, लेकिन अब इसकी फीस एक लाख रुपये कर दी गई है। ग्राम पंचायताें को अपने खाते से ही यह फीस देनी होती है। यह बात सीएम की बैठक में भी उठी थी, जिस पर सीएम ने कहा है कि वह इस मामले की ओर गौर करेंगे।
-देवेंद्र कुमार, कार्यकारी अभियंता, पंचायती राज विभाग, फतेहाबाद।
नहर की पटरियों को पक्का करने के लिए जो फीस बढ़ाई गई है, यह आदेश मुख्यालय से आए हैं। हमें मुख्यालय के आदेशों का पालन करना है और फिलहाल पटरी को पक्का करना या ग्राम पंचायत द्वारा कोई काम करना है तो इसकी एनओसी लेने के लिए एक लाख रुपये की फीस लेने का प्रावधान किया गया है।
-ओपी बिश्नोई, अधीक्षक अभियंता, सिंचाई विभाग, फतेहाबाद।