जिले में ब्लैक फंगस का खतरा बढ़ता जा रहा है। जिले में मंगलवार को तीन नए मरीज मिले हैं। तीनों ही मरीज पहले कोरोना संक्रमित हो चुके हैं और डायबिटीज पीड़ित भी हैं। जिले में अब तक 16 मरीजों में ब्लैक फंगस की पुष्टि हो चुकी है। दो मरीजों की मौत भी हुई है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में एक मरीज अस्पताल से डिस्चार्ज हो चुका है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक पांच मरीज अग्रोहा मेडिकल में तथा 8 अन्य अस्पतालों में उपचार करवा रहे हैं।
ये हैं ब्लैक फंगस के लक्षण
डॉक्टरों के मुताबिक स्टेरॉयड का अधिक दिनों तक इस्तेमाल, अनियंत्रित ब्लड शुगर के मरीज, कोविड मरीज को अधिक दिनों तक आईसीयू में उपचार देने तथा कैंसर व किडनी प्रत्यारोपण आदि की दवा लेने वालों को ब्लैक फंगस की बीमारी हो सकती है। आंख और नाक के आसपास दर्द या लालिमा, सिरदर्द, सांस लेने में परेशानी, मानसिक भ्रम, बुखार, खांसी व उल्टी में खून आना ब्लैक फंगस के मुख्य लक्षण हैं।
ब्लैक फंगस से बचाव के लिए सावधानी जरूरी
उपायुक्त डॉ. बांगड़ ने कहा कि अगर ब्लैक फंगस से पूर्व में ही सावधानी रखी जाए तो इस बीमारी से भी दूरी बनी रहेगी। बिना चिकित्सक की सलाह के स्टेरॉयड दवा शुरू न करें। धूल भरे निर्माण स्थलों पर जाते समय मास्क का प्रयोग करें, मिट्टी, काई या खाद इत्यादि का कार्य करते समय जूते, लंबी पतलून, लंबी बाजू की शर्ट और दस्ताने पहनें, व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखें, रोजाना अच्छे से नहाएं व खून में ग्लूकोज की मात्रा को नियंत्रित रखें। कोविड ठीक होने के बाद व मधुमेह के रोगी ब्लड ग्लूकोज का ध्यान रखें, स्टेरॉयड का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह पर व सही समय, सही खुराक और सही अवधि के साथ ही करें, ऑक्सीजन थेरेपी के लिए साफ और जीवाणु रहित जल का ही इस्तेमाल करें व एंटीबायोटिक और एंटी फंगस दवाओं का सोच समझकर इस्तेमाल करें।