फतेहाबाद। प्रधानमंत्री द्वारा तीन कृषि कानून वापस लिए जाने पर जिले में आंदोलन कर रहे किसानों ने खुशी जताई और लड्डु बांटकर जश्न मनाया। किसानों ने कहा कि यह उनकी बड़ी जीत है और किसानों का संघर्ष रंग लाया। किसान-मजदूर एकता के आगे सरकार को घुटने टेकने पड़े। हालांकि जब तक संसद सत्र में ये कानून रद्द नहीं हो जाते और एमएसपी की गारंटी नहीं मिलती तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
किसानों ने कहा कि आंदोलन के दौरान सरकार ने बड़ी संख्या में किसानों पर मुकदमे दर्ज किए थे। अलग-अलग 11 मामलों में 8 में पुलिस प्रशासन और 3 में रेलवे पुलिस द्वारा सैकड़ों किसानों पर मामले दर्ज हुए थे। सरकार और प्रशासन इन सभी मामलों को भी वापस ले। किसानों ने एमएसपी पर भी कानून बनाने और बिजली विधेयक 2020 को भी रद्द करने की भी मांग की। किसानों ने प्रतिक्रिया देते हुए सरकार के कानून रद्द करने के फैसले को देश की जनता की जीत बताया है।
जिले में दर्ज मुख्य मामले
-सदर फतेहाबाद में 27 नवंबर 2020 को गांव भोड़ा हौशनाक के पास बेरिकेड तोड़ने पर अज्ञात हजारों किसानों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था।
-26 नवंबर 2020 को सिटी थाना टोहाना में सैकड़ों किसानों पर मामला दर्ज हुआ था।
-1 जून, 2021 को जजपा विधायक देवेंद्र बबली गाड़ी रोकने, शीशा तोड़ने व निजी सचिव को चोट मारने के मामले में 7 नामजद सहित 15 लोगों पर मामला दर्ज हुआ था।
-3 जून, 2021 को देवेंद्र बबली के घर का घेराव करने पर मामला दर्ज हुआ था।
-19 दिसंबर, 2020 को पपैया पार्क के पास भाजपा के उपवास कार्यक्रम के दौरान हुए विवाद में पुलिस ने 7 नामजद व 300 अन्य किसानों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
किसानों की हमदर्द नहीं केंद्र सरकार : दौलतपुरिया
कृषि कानूनों के विरोध में भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता बलवान सिंह दौलतपुरिया ने कहा कि कृषि कानून रद्द करने की घोषणा किसान-मजदूर, दुकानदार, मंडी मजदूर की एतिहासिक जीत है। केंद्र सरकार किसानों की हमदर्द नहीं है। अगर ऐसा होता तो एक वर्ष पहले ही इन कानूनों को रद्द कर देती। सरकार एमएसपी गारंटी का कानून लाए और आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज मुकदमे भी सरकार वापस ले, ताकि किसान चिंता मुक्त होकर खेती कर सके।
किसानों पर दर्ज केस वापस लिए जाए
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुक्रवार को तीन कृषि बिल वापस लेने का जो निर्णय लिया है, वह अच्छा कदम है। जब तक सरकार इसे संसद सत्र में इसे कानूनी रूप से रद्द नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा और इस आंदोलन के दौरान जितने भी किसानों पर केस दर्ज किये गए हैं उन्हें वापस लिया जाए।
- बंसीलाल सिहाग, जिलाप्रधान बीकेयू खेती बचाओ संघर्ष समिति।
आंदोलन व धरने जारी रहेंगे
यह एक बड़ी जीत है, किसानों का संघर्ष रंग लाया है। जब तक एमएसपी पर कोई कानून नहीं बनता, तब तक आंदोलन व धरने जारी रहेंगे। आगे जो भी संयुक्त मोर्चे का जो फैसला आएगा, उसका पालन किया जाएगा।
- मनदीप नथवान, प्रदेशाध्यक्ष किसान संघर्ष समिति।
किसानों की शहादत काम आई
किसानों की शहादत काम आई है और इसके चलते ही सरकार को झुकना पड़ा। किसान आंदोलन एक साल से देश के लोगों का आंदोलन बन गया था। इसके चलते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुद कानून वापस लेने की घोषणा करनी पड़ी। किसान अभी घर वापसी नहीं करेंगे, वे संसद में कानून वापसी का इंतजार करेंगे।
- रविंद्र कसवां, पूर्व उपप्रधान, खेती बचाओ संघर्ष समिति
मृतक किसानों को मिले शहीद का दर्जा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस फैसले का हम स्वागत करते है व प्रधानमंत्री से मांग करते हैं कि आंदोलन के दौरान जो 700 के करीब किसानों की मौत हुई है उनको शहीद का दर्जा दिया जाए व उनके परिवार को उचित मुआवजा व सरकारी नौकरी दी जाए। इसको लेकर भी सरकार से बातचीत की जाएगी।
- संदीप काजला, हल्का प्रधान भारतीय किसान यूनियन।
एमएसपी पर किसानों की बात माननी चाहिए
मोदी सरकार के फैसले का स्वागत करते है। जब तक संसद में इसको रद्द नहीं करते, तब तक किसानों के साथ आंदोलन में शामिल रहेंगे। सरकार को एमएसपी पर कानून बनाकर किसानों की बात माननी चाहिए। तभी किसान आंदोलन खत्म करेंगे। इसके साथ ही बिजली विधेयक 2020 को भी सरकार रद्द करे।
- रामकुमार बहबलपुरिया, राज्य महासचिव, अखिल भारतीय खेत मजदूर यूनियन।