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फर्जी पासपोर्ट बनाने के मामले में पुलिसकर्मियों की भूमिका भी संदिग्ध, जांच में खुलेंगी परतें

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टोहाना में फर्जी पासपोर्ट मामले में आए दिन खुलासे हो रहे हैं। फर्जी पासपोर्ट बनवाने वाले लोगों की फेहरिस्त लंबी होती जा रही है। यह फेहरिस्त जितनी लंबी हो रही है, पुलिस के लिए भी उतनी ही परेशानी बढ़ने लगी है। इस मामले में कोई और नहीं, बल्कि खुद टोहाना पुलिस के कर्मचारी ही शक के दायरे में आ गए हैं। दर्जनों की संख्या में फर्जी पासपोर्ट बनाए गए हैं।
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खास बात यह है कि कोई भी पासपोर्ट पुलिस की वेरिफिकेशन के बगैर नहीं बन सकता है। ऐसे में सवाल यही है कि इतने सारे लोग फर्जी पासपोर्ट बनवाने में कामयाब कैसे हुए। या तो पुलिस ने अपने काम में लापरवाही बरती है या फिर पुलिस खुद आरोपियों से मिली हुई थी। हालांकि, पुलिस ने अपने ही विभाग के दो कर्मचारियों को भी इस मामले में गिरफ्तार किया है। मगर इस मामले में यह भी जांच होगी कि इन 56 लोगों के फर्जी पासपोर्ट दो ही पुलिसकर्मियों ने बनाए हैं, या कोई और भी शामिल रहा है। ऐसे में अंदेशा है कि कई और पुलिस कर्मचारी भी इस मामले में फंसेंगे। पुलिस के मुताबिक तीन साल की अवधि का रिकॉर्ड खंगाला गया है। आमतौर पर थानों में पुलिस कर्मियों के तबादले होते रहते हैं। इसलिए जांच का विषय ये है कि इस अवधि में कितने पुलिस कर्मियों ने पासपोर्ट बनाने के कार्य में अपनी सेवाएं दीं। इस हिसाब से जांच लंबी चलने की संभावना है।
ऐसे होती है वेरिफिकेशन
पासपोर्ट के लिए आवेदन करने के बाद फाइल संबंधित थाने में आती है। इसके बाद पुलिस उस व्यक्ति को सूचित करती है, जिसने आवेदन किया हो, उसे कहा जाता है कि अपने साथ एक पड़ोसी व एक किसी मौजिज व्यक्ति यानी पंच, सरपंच या पार्षद को लेकर थाने में आना है। आवेदक अपने साथ दो लोगों को थाने में लेकर जाता है। वहां उनके दस्तावेज जांचे जाते हैं। उनके पते दर्ज किए जाते हैं। वोटर कार्ड व आधार कार्ड तक की प्रति ली जाती है। उनके बयान दर्ज किए जाते हैं। उसके बाद पुलिस बताती है कि संबंधित व्यक्ति का यही स्थायी पता है। बकायदा उसका आपराधिक रिकॉर्ड भी रिपोर्ट में लिखा जाता है। इस प्रक्रिया में थाने के मुंशी व संबंधित बीट इंचार्ज का महत्वपूर्ण रोल रहता है।
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कोट
57 लोगों पर केस दर्ज हो चुका है। जांच में आगे कोई नया नाम आएगा तो उस पर भी केस दर्ज होगा। इस मामले में गहनता से जांच की जाएगी। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। यदि कोई पुलिसकर्मी दोषी मिलेगा, तो उस पर भी कार्रवाई होगी।
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-राजेश कुमार, पुलिस अधीक्षक, फतेहाबाद।
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