फतेहाबाद। नागरिक अस्पताल के ब्लड बैंक में करीब छह साल तक वसूली गई राशि बैंक खाते में जमा नहीं करवाई गई। गबन के इस मामले में सिविल सर्जन कार्यालय ने आरोपी कर्मचारी को बकाया राशि जमा करवाने के लिए नोटिस जारी किया है। कर्मचारी को पांच दिनों के अंदर राशि जमा करवानी होगी। ऐसा न करने पर विभाग अगली कार्रवाई शुरू करेगा। इसमें पुलिस कार्रवाई भी शामिल है।
बताया जा रहा है कि समिति की जांच में एक कर्मचारी सामने आया है, जिसने वसूली गई राशि बैंक खाते में जमा नहीं करवाई। मामले का खुलासा हुआ तो संबंधित कर्मचारी ने करीब चार लाख रुपये जमा करवा दिए जबकि जांच में करीब 32 लाख रुपये के गबन का आरोप है। अब बकाया राशि की वसूली के लिए विभाग ने कर्मचारी को नोटिस जारी किया है।
इस मामले में लापरवाही बरतने वाले संबंधित अधिकारियों पर भी विभागीय कार्रवाई हो सकती है। ब्लड बैंक में सरकारी अस्पताल में दाखिल मरीज के लिए ब्लड निशुल्क देय है। अगर कोई निजी अस्पताल से मरीज आता है तो उससे 1,100 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से शुल्क लिया जाता है। पहले ये शुल्क 1,050 रुपये था।
बजट की जरूरत पड़ी तो हुआ गड़बड़ी का खुलासा :
नागरिक अस्पताल प्रशासन को जुलाई में जब बजट की जरूरत पड़ी तो ब्लड बैंक का खाता संभाला गया। बैंक खाते में राशि नहीं मिल सकी। संबंधित कर्मचारियों से जब सवाल-जवाब किए गए तो वह स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए। तत्कालीन एसएमओ डॉ. सुभाष ने बीती नौ जुलाई को मामले की शिकायत सिविल सर्जन को दी। सिविल सर्जन ने जांच समिति का गठन किया। इसमें उप सिविल सर्जन मेजर डॉ. शरद तुली, डॉ. गुंजन बंसल, लेखाकार अधिकारी रविंद्र को शामिल किया गया। समिति ने मामले में वर्ष 2019 से वर्ष 2024 तक के प्रभारियों और ब्लड बैंक के कर्मचारियों समेत 17 लोगों के बयान दर्ज किए।
जांच में समिति को गायब मिलीं 12 रसीदें :
समिति ने रिकॉर्ड जांचा तो बिल बुक में से 12 रसीदों की प्रतिलिपि गायब मिली। ब्लड बैंक को नवंबर 2018 से वर्ष 2024 तक 27 बिल बुक जारी हुई हैं। इसमें 12 रसीदें गायब मिली हैं।
मामले में संबंधित कर्मचारी को नोटिस जारी कर दिया गया है। नोटिस में पांच दिनों के अंदर बकाया राशि जमा करवाने के लिए कहा गया है। ऐसा न करवाने पर उच्चाधिकारियों के निर्देश पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। - मेजर डॉ. शरद तुली, उप सिविल सर्जन, फतेहाबाद।