फतेहाबाद। उपभोक्ताओं को तौल में होने वाली संभावित धोखाधड़ी से बचाने के लिए नापतौल विधिक विज्ञान विभाग ने सघन जांच अभियान शुरू किया हुई है। विभाग की टीमें जिले भर में दुकानों और धर्मकांटों का निरीक्षण कर रही हैं।
जांच अभियान के दौरान अब तक 400 से अधिक धर्मकांटों की सटीकता और उनके रिकॉर्ड की जांच की जा चुकी है। इसके साथ ही खुदरा दुकानों में उपयोग हो रहे कांटों की भी पड़ताल की गई। जांच के दौरान नहला क्षेत्र स्थित एक धर्मकांटे में गंभीर खामियां सामने आईं। जांच में तौल मानकों में निर्धारित सीमा से अधिक अंतर आ रहा था। जांच में टीम ने नियमों के उल्लंघन को गंभीरता से लेते हुए संबंधित धर्मकांटा संचालक पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि माप-तौल में लापरवाही या जानबूझकर की गई गड़बड़ी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। भविष्य में भी इसी तरह के निरीक्षण जारी रहेंगे। अधिकारियों ने दुकानदारों और धर्मकांटा संचालकों को चेतावनी दी कि मानकों का पालन नहीं करने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी
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सालाना शुल्क न भरने वालों की निगरानी
जिले के कई दुकानदार और धर्मकांटा संचालक वार्षिक सत्यापन शुल्क समय पर जमा नहीं करवा रहे हैं। नियमानुसार, हर साल कांटों की शुद्धता की जांच करवाकर सरकारी शुल्क जमा करना अनिवार्य है और विभाग से सत्यापन प्रमाणपत्र लेना होता है। विभाग ने ऐसे सभी संचालकों को नोटिस जारी किया है जिन्होंने समय पर अपनी फीस जमा नहीं करवाई है।
:: जांच अभियान मकसद विभाग का जुर्माने वसूलने का नहीं है। बल्कि व्यापारियों को जागरूक करना और ग्राहकों को पूरा वजन दिलाना है। दुकानदारों व धर्मकांटा संचालकों से अपील है कि वे कांटों का समय-समय पर कैलिब्रेशन करवाते रहें और निर्धारित सालाना फीस समय पर जमा करें। किसी भी दुकान या धर्मकांटे पर तौल गलत पाया गया या बिना नवीनीकरण के कांटे का प्रयोग मिला, जुर्माने के साथ-साथ लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई की जाएगी।
-प्रदीप अरोड़ा, उपनिरीक्षक, विधिक माप विज्ञान विभाग, फतेहाबाद।