फतेहाबाद। हेलो! पुलिस, मैं गांव धांगड़ से बोल रही हूं, पति मुझे पीट रहा है, जल्दी आ जाओ। सूचना मिलने पर डायल 112 यानि ईआरवी 226 टीम 4 मिनट 55 सेकेंड में मौके पर पहुंची और पति को थाने में लेकर आई। इसी तरह रात 12 बजे दिल्ली से आई युवती बस स्टैंड पर पहुंची लेकिन वहां से पर घर आने के लिए मदद नहीं मिली।
युवती ने डायल 112 पर कॉल करके कहा कि वाहन नहीं मिल रहा है क्या हेल्प मिलेगी। ईआरवी यानि 217 की टीम मौके पर पहुंची और युवती को घर छोड़ा गया। डायल 112 लोगों के लिए मददगार बन रही है। पुलिस विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2025 के दौरान डायल 112 पर 74,063 आपातकालीन कॉल प्राप्त हुईं। इनमें से 54,429 इवेंट तैयार किए गए।
15,012 कॉल पर डायल 112 की टीमें औसत 5 से 6 मिनट के भीतर मौके पर पहुंचीं, जबकि 39,417 मामलों में निर्धारित 10 से 12 मिनट के भीतर पुलिस सहायता उपलब्ध कराई गई है। डायल 112 टीम के लिए शहरी क्षेत्र में 15 और ग्रामीण क्षेत्र में 20 मिनट का समय तय किया गया है। अगर कोई देरी से पहुंचता है तो कारण बताओ नोटिस जारी होता है। जिले में पुलिस के पास डायल 112 पर मदद के लिए 22 गाड़ियां हैं।
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बाढ़ में घर पर फंसे जच्चा-बच्चा को पहुंचाया था सुरक्षित जगह
भूना में पिछले साल शहर में बाढ़ के हालात के बीच घर पर फंसे जच्चा-बच्चा को डायल 112 की टीम ने निकालकर सुरक्षित जगह पर पहुंचाया था। इसके अलावा बाहर से परीक्षा देने आए बच्चों को समय पर उनके केंद्र तक पहुंचाना भी सुर्खियों में रहा है।
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एसपी हर सप्ताह करते हैं निगरानी
पुलिस अधीक्षक सिद्धांत जैन स्वयं डायल 112 की कार्यप्रणाली की लगातार मॉनिटरिंग करते हैं। वे समय-समय पर इवेंट की समीक्षा कर क्विक रिस्पॉन्स सिस्टम को परखते हैं और जहां भी लापरवाही सामने आती है, वहां संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करते हैं। यही कारण है कि डायल 112 की कार्यक्षमता निरंतर बेहतर होती जा रही है।
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जिले में डायल 112 भरोसे, संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई का पर्याय बन चुकी है। पुलिस का यह प्रयास निस्संदेह जिले को एक सुरक्षित संवेदनशील और भयमुक्त समाज की ओर तेजी से अग्रसर कर रहा है।
-सिद्धांत जैन, पुलिस अधीक्षक।