फतेहाबाद। धान की फसल काटने को लेकर की गई जल्दबाजी किसानों पर भारी पड़ रही है। अनाज मंडी में गीला धान लेकर आने की वजह से किसानों को फसल बेचने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं आर्थिक नुकसान भी हो रहा है। 17 प्रतिशत नमी से अधिक होने पर प्रति प्रतिशत एक कट लगता है। प्रति कट 20 रुपये का नुकसान होता है। ऐसे में किसी की किसान की फसल पर पांच तो किसी के सात कट लगने पर 100 से 140 रुपये का प्रति क्विंटल आर्थिक हानि होती है। यही कारण है कि आढ़तियों को बोली करने में भी चार से पांच दिन लग जाते हैं।
अधिकांश किसान गीला धान की फसल ट्रॉली में लेकर आते हैं। उसे सुखाने के लिए अब तो अनाज मंडी में जगह भी नहीं मिल रही है। वापस ले जाना भी आसान नहीं है। ऐसे में एक बार नमी बढ़ने के बाद जल्दी धान सुख नहीं रहा है। ऐसे में किसानों को आर्थिक नुकसान झेलते हुए ज्यादा नमी के साथ ही धान बेचना पड़ रहा है। हाईब्रिड धान की खरीद में सबसे ज्यादा दिक्कत आ रही है। हाईब्रिड धान मुश्किल से बिक रहा है। अनाज मंडी में बासमती किस्म में मुच्छल, 1121, 1509, 1401 आदि किस्मों की प्राइवेट खरीद हो रही है जबकि सरकार परमल हाईब्रिड धान की खरीद करती है। किसानों व आढ़तियों के अनुसार खरीद प्रक्रिया सुस्ती से चल रही है।
जिले में अब तक हुई एक लाख 72 हजार 427 मीट्रिक टन खरीद
जिले में सात मंडियों व 31 खरीद केंद्रों पर अब तक एक लाख 72 हजार 427 मीट्रिक टन धान की खरीद की जा चुकी है। इनमें से खाद्य आपूर्ति विभाग ने 19 हजार 180 मीट्रिक टन, हैफेड ने 73 हजार 950 मीट्रिक टन व हरियाणा वेयरहाउस ने 79 हजार 297 मीट्रिक टन धान की खरीद की है। इसमें से एक लाख 917 मीट्रिक टन धान का उठान किया गया है, जो खरीद का 61 प्रतिशत है। खाद्य आपूर्ति विभाग ने 11 हजार 615 मीट्रिक टन, हैफेड ने 43 हजार 851 मीट्रिक टन और हरियाणा वेयरहाउस ने 45 हजार 451 मीट्रिक टन धान का उठान किया है।
अब तक किसानों को भुगतान में मिले 178 करोड़ रुपये
अब तक जिले के किसानों को धान बेचने के बदले में 178 करोड़ 44 लाख रुपये की राशि का भुगतान किया जा चुका है। इसमें से खाद्य आपूर्ति विभाग द्वारा 17 करोड़ 91 लाख रुपये, हैफेड द्वारा 77 करोड़ 58 लाख रुपये व हरियाणा वेयरहाउस द्वारा 82 करोड़ 95 लाख रुपये का भुगतान किया गया है।
कोट
पांच दिन बाद बिकी फसल
मैं पांच दिन पहले अनाज मंडी में धान की फसल लेकर आया था। मगर नमी ज्यादा बता दी गई। पांच दिन बाद मंगलवार को मेरी फसल बिक पाई है।
कृष्ण कुमार, किसान, गांव जांडली कलां।
नमी होने से वापस घर ले गया फसल
छह दिन पहले धान लेकर मंडी में आया था, लेकिन नमी ज्यादा बताई तो वापस घर ले गया। अब मंगलवार को खरीद हो पाई है।
अजीत सिंह, किसान, ढाणी ठोबां।
कोट
धान की खरीद प्रक्रिया लगातार जारी है। 72 घंटे में किसानों को भुगतान मिल रहा है। किसान निर्धारित तिथि को ही मंडी में फसल लेकर आएं। फसल को भी सूखाकर लाएं ताकि बेचने में कोई परेशानी न हो।
महावीर कौशिक, उपायुक्त, फतेहाबाद।