फतेहाबाद। जिला प्रशासन ने साल 2023 के अप्रैल माह के अंत में पशु मेले को ज्यादा गर्मी होने के चलते एक माह के लिए बंद किया था। इसके बाद बाढ़ आ गई। पशु मेले वाले स्थान पर पानी भर जाने से काफी समय तक पशु मेला शुरू नहीं हो सका।
जिले के पशु व्यापारी व किसान करीब 20 माह से पशु मेला शुरू करवाने के लिए प्रयास कर रहे हैं लेकिन प्रशासन इन लोगों को सिर्फ आश्वासन दे रहा है। यहां तक की तत्कालीन पंचायत मंत्री देवेंद्र सिंह बबली ने भी अधिकारियों को पशु मेला शुरू करने के निर्देश दिए थे। जिले के रतिया रोड पर स्थित गांव अयाल्की में लगने वाले पशु मेले में हरियाणा के अलावा पंजाब और यूपी से भी पशु खरीद-बेच के लिए व्यापारी आते हैं।
पशु मेला आरंभ करवाने के लिए व्यापारी व किसानों ने साल 2023 के नवंबर माह में करीब एक माह तक फतेहाबाद के लघु सचिवालय के आगे धरना भी दिया। इस धरने को शहर के अनेक पार्षदों ने अपना समर्थन दिया था। उस समय प्रशासन से सिर्फ आश्वासन मिला, कार्रवाई कोई भी नहीं हुई।
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अयाल्की में लगता है मेला
- फतेहाबाद के रतिया रोड पर गांव अयाल्की के पास पशु मेला लगाया जाता है। 30 अप्रैल 2023 को प्रशासन ने यह मेला गर्मी के मौसम को देखते हुए डेढ़ माह के लिए बंद करवा दिया था। डेढ़ माह बाद यहां मेला लगना था, लेकिन अधिकारियों ने मेला आरंभ करने की ओर ध्यान नहीं दिया। इसके बाद साल 2023 के जुलाई माह में बाढ़ आने के कारण मेला आरंभ नहीं किया गया। करीब 20 माह से बंद पड़े पशु मेले के कारण पशु व्यापारी व किसान परेशान हैं। पशु व्यापारी संघ के अध्यक्ष मोहरी राम का कहना हैं कि इस मेले से अनेक लोगों का रोजगार चलता है। यहां हर सप्ताह पशुओं को लोड करने के लिए 300 से 400 छोटी गाड़ियां, 50 के करीब कैंटर व ट्रक आते हैं। वाहन चालकों के लिए यह रोजी रोटी का बड़ा साधन है। इसके अलावा यहां पर चाय वाले, टैंट वाले, आए हुए व्यापारियों व किसानों को पानी पिलाने वाले कुर्सी व चारपाई किराये पर देने वाले पहुंचते हैं और सप्ताह भर की कमाई करके जाते हैं। मेला बंद होने के कारण पशु व्यापारियों से लेकर सभी के रोजगार पर असर पड़ा है।
दूसरे जिले में किसान की कटती है 9 हजार की पर्ची
- पशु व्यापारी संघ फतेहाबाद के प्रधान मोहरी राम ने बताया कि फतेहाबाद से अगर कोई किसान अपना पशु बेचने के लिए पंजाब या अन्य राज्य में जाता है तो उसे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है, इसके अलावा यहां प्रशासन को भी राजस्व का नुकसान हो रहा है। यहां पर मात्र 100 रुपये की एंट्री फीस व पशु बिकने के बाद में 300 रुपये फीस लगती है। मेला बंद होने से सरकार को प्रति सप्ताह 15 लाख रुपये तक का नुकसान हो रहा है। उन्होंने बताया कि वह इस मामले उपायुक्त, डीडीपीओ, जिला परिषद के सीईओ से कई बार मिल चुके हैं। सीईओ ने तो ऑर्डर भी जारी कर दिए थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब भी उनको कोई ठोस जवाब नहीं मिल रहा है।
पशु मेला शुरू करने के लिए टेंडर लगाया गया था, लेकिन आवेदन करने वाली एजेंसी ने कोर्ट में केस डाल दिया है, जिस कारण टेंडर प्रकिया पूरी नहीं हो पाई।
- अनिल कुमार, बीडीपीओ, फतेहाबाद।