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टोहाना के गांवो में तेजी के साथ बढ़ रहा है सब्जियों का रकबा, मिर्च व पेठा की फसल उगाकर लाभ कमा रहे किसान

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गांव गाजुवाला में सब्जी की फसल की संभाल करते हुए किसान। - फोटो : Fatehabad
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टोहाना। खंड के गांव समैन, गाजुवाला, डांगरा व बिढाई खेड़ा के किसान परंपरागत खेती को छोड़कर आधुनिक खेती की तरफ अग्रसरित हो रहे हैं। इन गांवों से जुड़े काफी संख्या में किसान आधुनिक खेती को अपनाकर दूसरे किसानों के लिए रोल मॉडल बन रहे हैं।
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गांव गाजुवाला के कई किसानों ने परंपरागत खेती के साथ अपने खेतों में सब्जियों का रकबा बढ़ा लिया है। किसान ओमप्रकाश व प्रदीप कुमार दो भाई हैं। दोनों भाइयों ने अपने खेतों में आठ एकड़ में तौरी, पेठा, मिर्च, घीया व खीरे की सब्जियां उगाई है। किसान प्रदीप कुमार ने बताया कि वह अपने खेत मे धीरे-धीरे सब्जियों का रकबा बढ़ा रहे हैं। इससे गांव के दूसरे किसान भी अपने खेतों में सब्जियों की खेती करने के लिए प्रेरित होने लगे हैं। किसान के अनुसार वह अपनी सब्जियों को पंजाब व राजस्थान तक सप्लाई करने लगे है। संवाद
पेठा की फसल से मिल सकता है दो लाख रुपये तक का फायदा
गांव गाजुवाला के किसान शांति स्वरूप व प्रदीप सिहाग ने बताया कि पेठे की खेती से अच्छा लाभ कमाया जा सकता है। पेठे की फसल मात्र तीन महीने में तैयार हो जाती है। इसका प्रति एकड़ खर्च काफी कम है। एक एकड़ में मात्र 2400 रुपये का बीज डाला जाता है। पेठे की फसल पर 10 हजार रुपये प्रति एकड़ खर्च होता है। एक एकड़ में 100 क्विंटल तक पेठे का उत्पादन होने का अनुमान है। यदि सब्जी मंडी में पेठे का भाव अच्छा मिल जाए तो इससे बड़ा मुनाफा मिलता है। यदि प्रति एकड़ की बात की जाए तो किसान को डेढ़ से दो लाख रुपये तक कि आमदनी हो सकती है। फसल पकने पर सब्जी मंडी में भाव कम मिलता है तो पेठे को तीन महीने तक स्टॉक भी किया जा सकता है व मंडी में अच्छा भाव मिलने पर बेचा जा सकता है। इसी तरह मिर्च की खेती से भी किसान अच्छी आमदनी ले सकता है। मिर्च की फसल भी 3 से 4 महीने में तैयार हो जाती है व किसान को प्रति एकड़ 2 लाख रुपये तक का मुनाफा हो सकता है।
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