संवाद न्यूज एजेंसी
समैन। बारिश से खराब हुई फसलों के मुआवजे के लिए सरकार ने ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल शुरू किया था। पोर्टल पर अपनी फसलों का विवरण अपलोड कर किसान नुकसान की भरपाई के लिए आवेदन कर सकते हैं।
जिले के 207 गांवों के 14,125 किसान 88,258 एकड़ में खराब फसलों के लिए आवेदन कर चुके हैं। फिलहाल पोर्टल में तकनीकी खराबी के कारण यह बहुत धीमा और कई बार बंद हो रहा है। इस कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसान सुबह से शाम तक सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) पर फसलों का विवरण अपलोड करवाने के लिए इंतजार कर रहे हैं। पोर्टल की धीमी गति और बार-बार आने वाले एरर के कारण काम अधूरा रह जाता है।
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बारिश के जलभराव से खराब हुई फसलों के ब्योरे को क्षतिपूर्ति पोर्टल पर अपलोड करवाने में परेशानी झेलनी पड़ रही है। वे सुबह से शाम तक सीएससी पर चक्कर काट रहे हैं। पोर्टल बहुत स्लो है, जिससे उनको घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
- सतपाल सिंह, किसान, गांव कन्हड़ी।
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ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल में तकनीकी खराबी होने के कारण यह बहुत ही स्लो चल रहा है। किसान सीएससी पर चक्कर काटने को मजबूर हैं। सरकार को जल्द से जल्द तकनीकी समस्या को दूर करवा उनकी परेशानियों को दूर करना चाहिए।
- हरपाल सिंह, किसान, गांव नांगली।
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बारिश की वजह से खेतों में खराब हुई फसलों की वजह से किसान पहले ही परेशान है, अब पोर्टल बंद होने से उनकी समस्या बढ़ गई है। सरकार को किसानों की पीड़ा को समझते हुए पोर्टल की तकनीकी समस्या को जल्द से जल्द दूर करना चाहिए।
- संदीप सिंह, किसान, गांव गाजुवाला।
ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल में तकनीकी खामी के चलते उनकी परेशानी बढ़ गई है। किसान सीएससी पर चक्कर काटने को मजबूर हैं। प्रदेश सरकार को जल्द से जल्द पोर्टल की समस्या दूर करवानी चाहिए, ताकि खराब फसलों का ब्योरा अपलोड करवा सकें।
-सुरेंद्र, किसान, गांव गाजुवाला।
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ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल सोमवार से काफी धीमा चल रहा है, जिसके कारण फसलों का ब्योरा अपलोड करने में काफी दिक्कत आ रही है। डाटा अपलोड में बहुत समय लग रहा है। केंद्र पर बड़ी संख्या में किसान बारिश से खराब हुई फसलों का ब्योरा अपलोड करवाने के लिए आ रहे हैं, लेकिन पोर्टल में तकनीकी खामी के चलते बहुत परेशानी उठानी पड़ रही है।
-प्रदीप कुमार, सीएससी संचालक, पिरथला