फतेहाबाद। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का मूल्यांकन करने के लिए शिक्षा विभाग की तरफ से बुधवार को सेट परीक्षाएं शुरू हो गई हैं। मगर पहले दिन ही परीक्षा मात्र औपचारिकता बनकर रह गई। शिक्षक प्रश्न पत्रों की कॉपी करवाने के लिए फोटोस्टेट की दुकानों पर घूमते रहे। शिक्षा विभाग ने खुद प्रश्न पत्र की कॉपियां जारी नहीं की, बल्कि स्कूलों की मेल पर ही प्रश्नपत्र की एक कॉपी भेजकर औपचारिकता पूरी कर ली और स्कूल इंचार्ज को आदेश दे दिए कि वह खुद प्रश्नपत्रों की कॉपी करवाकर परीक्षा ले लें।
विद्यार्थी मूल्यांकन परीक्षा कक्षा तीसरी से बारहवीं तक के विद्यार्थियों की हो रही है। ये परीक्षाएं 24 दिसंबर तक होंगी। इसके अलावा कक्षा पहली और दूसरी के विद्यार्थियों की मौखिक परीक्षाएं ली जा रही है। अहम बात यह भी है कि सरकारी स्कूलों में 50 फीसदी से कम विद्यार्थी आ रहे है। विभाग की ओर से विद्यार्थी मूल्यांकन परीक्षा के प्रश्नपत्र एक दिन पहले स्कूलों की मेल पर भेजे जा रहे हैं और फिर स्कूल इंचार्ज फोटोस्टेट की दुकानों पर जाकर कॉपी करवा रहे हैं।
शिक्षक बोले- एनएएस प्रश्न पत्रों का नहीं मिला बजट
पिछले दिनों शिक्षा विभाग ने नेशनल अचीवमेंट सर्वे करवाया था, इसको लेकर प्रश्नपत्रों की फोटोकॉपी स्कूलों ने ही करवाई थी। शिक्षकों का कहना है कि इन प्रश्नपत्रों की फोटोकॉपी करवाने का खर्च अपनी जेब से कर चुके है लेकिन बजट नहीं मिला है।
शिक्षा विभाग विद्यार्थी मूल्यांकन परीक्षाओं को लेकर मजाक कर रहा है। प्रश्नपत्रों को छपवाने के लिए पहले टेंडर करने के आदेश किए जाते हैं और फिर रद्द कर दिया जाता है। अब स्कूल इंचार्ज को प्रश्नपत्र मेल पर भेजे जा रहे है, शिक्षक फोटोकॉपी करवाने के लिए घूम रहे है। यहां तक की प्रश्नपत्रों को लेकर गोपनीयता भी नहीं रही है।
- देवेंद्र सिंह दहिया, राज्य चेयरमैन, राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ
प्रश्नपत्र विभाग ने नहीं छपवाएं है। स्कूल इंचार्ज के पास सुबह भेजे जा रहे है, जितनी उन्हें जरूरत है, उसके मुताबिक वह फोटोकॉपी करवा रहे है। इसको लेकर फंड रखा गया है।
- दयानंद सिहाग, जिला शिक्षा अधिकारी