प्रदेश भर में आए दिन स्कूल बसों के साथ हो रहे हादसों के बाद भी जिला प्रशासन की नींद खुलने का नाम नहीं ले रही है। सुप्रीम कोर्ट के स्कूल बसों के संदर्भ में दिए गए दिशा-निर्देशों की न तो स्कूल संचालक परवाह कर रहे हैं और न ही जिला प्रशासन इन नियमों को पूरा करने के लिए स्कूल संचालकों पर कोई दबाव बना रहा है। ऐसे में आए दिन हजारों स्कूल बच्चों की जानें अधर में लटकती हैं। लेकिन शायद प्रशासन को किसी बड़े हादसे का इंतजार है।
जिले भर में दो सौ अधिक प्राइवेट स्कूल
शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले भर में दो सौ से अधिक प्राइवेट स्कूल हैं। इनमें अधिकतर स्कूलों में स्कूल बसें उपलब्ध हैं। लेकिन इक्का-दुक्का स्कूलों को छोड़कर अधिकतर बसों में निर्धारित मानक पूरे नहीं होते। बावजूद इसके जिला प्रशासन के अफसर इस स्कूलों पर दया-दृष्टि लगातार बनाए रखते हैं। हैरानी इस बात को लेकर है कि विगत वर्षों में स्कूल बसों के कई हादसे हुए हैं। तीन माह पहले भी फतेहाबाद के एक निजी स्कूल की बस बड़ोपल नहर में जा गिरी थी। गनीमत ये रही थी कि उस वक्त बस में कोई सवारी नहीं थी।
ये हैं स्कूल बसों के लिए नियम
1. अच्छी क्वालिटी के सीसीटीवी कैमरे की व्यवस्था।
2. सीटों के अनुसार ही विद्यार्थियों को चढ़ाया जाए।
3. बसों में महिला एवं पुरुष सहायक होना चाहिए।
4. स्कूल बस कंडम नहीं होनी चाहिए।
5. बस पर स्कूल का नंबर, इमरजेंसी नंबर एवं अन्य सहायता नंबर अंकित हों।
6. बस के ड्राइवर आदि सारी योग्यताओं को पूरा करते हों।
महज नोटिसों पर सिमटी प्रशासनिक कार्रवाई
स्कूल बसों के नियम पूरे न होने पर प्रशासनिक कार्रवाई की ढिलाई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीते दो माह में आरटीए एवं ट्रैफिक पुलिस ने जितनी भी कार्रवाई की है, उसमें संबंधित स्कूल को नोटिस देने के अलावा कुछ हुआ ही नहीं। इतना ही नहीं, जिला प्रशासन इस मामले में कितना गंभीर है, इस बात से अंदाजा लगाइए कि खुद उपायुक्त एवं ट्रैफिक पुलिस के अधिकारी कम से कम पांच बार स्कूल संचालकों को स्कूल बसों के नियम पूरे करने के लिए मोहलत दे चुके हैं।
नियम पूरे न करने वाले स्कूल बसों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। चेकिंग भी शुरू की जाएगी।
-संतलाल पचार, कार्यवाहक आरटीए, फतेहाबाद।