नागरिक अस्पताल के अधिकारियों और कर्मचारियों को यहां के अफसरों का कोई डर नहीं है, चाहे व्यवस्था बिगड़ती रहे। अस्पताल में कायाकल्प टीम को दिखाने के लिए मरीजों की सहूलियत को लेकर कई व्यवस्थाएं की गई थी लेकिन उनके जाते ही हालात फिर वैसे हो गए जैसे पहले होते है। ओपीडी कक्षों, ब्लड सैंपल प्वाइंट के बाहर मरीजों के बैठने के लिए जहां बेंच रखे गए थे, उन्हें हटा लिया गया है। यहां तक कि रजिस्ट्रेशन काउंटर से लेकर डिस्पेंसरी के बाहर अव्यवस्था फैली हुई है। मरीजों को बैठने के लिए जगह नहीं मिल रही है। यहां तक कि अल्ट्रासाउंड सेंटर के बाहर भी व्यवस्था नहीं है, गर्भवती को मशीनों के ऊपर बैठकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है। संवाद
जानिये अस्पताल में रोजाना ओपीडी
विभाग ओपीडी
महिला रोग विशेषज्ञ 175 से 200
दंत रोग विशेषज्ञ 70 से 80
ईएनटी 50 से 60
नेत्र रोग विशेषज्ञ 100 से 125
फीजिशियन 125 से 150
चर्म रोग विशेषज्ञ 120 से 130
मनोरोग विशेषज्ञ 80 से 90
शिशु रोग विशेषज्ञ 60 से 70
सैंपल कक्ष के बाहर महिलाओं को होना पड़ रहा है घंटों खड़े
नागरिक अस्पताल में ब्लड सैंपल कक्ष के बाहर महिलाओं को घंटों खड़े रहना पड़ रहा है। अस्पताल में 600 से 700 मरीजों की ओपीडी है। इसमें करीब 250 से 300 लोगों को ब्लड सैंपल देने होते है। सैंपल कक्ष के बाहर मरीजों के बैठने की व्यवस्था नहीं है। पिछले माह 16 जुलाई को जब कायाकल्प टीम आनी थी तो सैंपल कक्ष के बाहर बैठने की व्यवस्था की गई थी लेकिन अब यहां से बैंच हटा लिए गए है। ये ही हालात तब होते हैं जब करीब दो घंटे बाद मरीजों को रिपोर्ट लेने के लिए लाइन में लगना पड़ता है।
लाइनों में गर्भवती, बैठने की नहीं व्यवस्था
सरकारी अस्पतालों में आने वाली गर्भवती के लिए व्यवस्था को लेकर स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय ने सख्त आदेश जारी कर रखे हैं। लेकिन जिला नागरिक अस्पताल में गर्भवती के बैठने की भी व्यवस्था नहीं है। ओपीडी कक्ष के बाहर गर्भवती को लंबी लाइन में घंटो इंतजार करना पड़ रहा है। ये ही नहीं लाइनों में खड़ी गर्भवती के लिए पंखे हैं लेकिन चलते नहीं हैं।
लंबी लाइन पंखा एक
अस्पताल में ओपीडी बढ़ने के साथ-साथ डिस्पेंसरी पर मरीजों की संख्या बढ़ी है। लेकिन व्यवस्था वो ही कायम है। अस्पताल में डिस्पेंसरी के बाहर मरीज को लंबे समय तक इंतजार करने के बाद दवाई मिल रही है। डिस्पेंसरी के बाहर लगाया गया माइक और डिस्पले सिस्टम खराब हो चुका है। मरीज को 30 से 40 मिनट तक लाइन में लगने के बाद दवाई मिल रही है। डिस्पेंसरी के बाहर हालात ये हैं कि यहां मात्र एक ही पंखा चलता है।
अव्यवस्था के कारण नहीं ले पा रहा 70 अंक
कायाकल्प योजना के तहत 100 में से 70 अंक लेना जरूरी है। 70 अंक आने के बाद ही संबंधित स्वास्थ्य केंद्र प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता में भाग ले सकता है। अब तक चार बार इस प्रतियोगिता से जिला अस्पताल बाहर हो चुका है। हाल ही में हुए निरीक्षण को लेकर परिणाम नहीं आया है।
कोट
ओपीडी के बाहर बेंच की व्यवस्था की गई है, अगर कहीं पर ज्यादा की जरूरत है तो वहां पर व्यवस्था कर दी जाएगी।
- डॉ. हमेश बंसल, नोडल अधिकारी, कायाकल्प योजना।
पहले : कायाकल्प टीम आने पर लैब के सामने लगाए गए बेंच। फोटो 15 जुलाई की है। - फोटो : Fatehabad