फतेहाबाद। भ्रष्टाचार के आरोप में नामजद रतिया पूर्व एसडीएम भारत भूषण कौशिक, उनकी पत्नी सारिका व आरोपी महिला कर्मजीत कौर की जमानत याचिका को फतेहाबाद की एडीजे कोर्ट ने खारिज कर दिया। एडीजे सुनील जिंदल की कोर्ट में सोमवार को सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने कहा कि एचीएस अधिकारी का जमीन सौदों में एक सजायाफ्ता व्यक्ति के साथ संबंध हैं। ऐसे में एचसीएस का एक्ट ऑफ कंडक्ट ठीक नहीं है। आरोपियों के अधिवक्ता की मानें तो अब वे पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का रुख करेंगे।
रतिया में जमीन के सौदे में हुए भ्रष्टाचार के मामले में सुनवाई करते हुए उपजिला न्यायवादी ने कहा कि एसडीएम दंपती के मोबाइल फोन बरामद करने से लेकर बैंक खातों की जांच की जानी है। ऐसे में जमानत देना उचित नहीं है। कोर्ट को बताया गया कि इससे पहले भी रतिया में एक अन्य जमीन सौदे में एसडीएम के खाते से लाखों रुपये की राशि का भुगतान किया गया है और यह जमीन एसडीएम के रिश्तेदार के नाम की गई है। एसडीएम की पत्नी ने भी रुपये दिए हैं। इस पर पूर्व एसडीएम के वकील पीके संधीर ने कहा मामले का सुनवाई किए जा रहे केस से कोई संबंध नहीं है।
इस पर सरकारी वकील ने कहा सरकारी कर्मचारी 50 हजार रुपये से अधिक राशि का भुगतान नहीं कर सकता है। इस पर एडवोकेट संधीर ने इस पर कहा कि एसडीएम की पत्नी सरकारी कर्मचारी न होकर एक निजी कॉलेज में पढ़ाती हैं। उन्होंने कोर्ट को बताया कि विजिलेंस के केस में कोई शिकायतकर्ता नहीं है। ऐसे में केस दर्ज करने से पहले नोटिस देना जरूरी था। हालांकि स्टांप ड्यूटी के मामले में उन्हें नोटिस मिल चुका है और निर्धारित स्टांप ड्यूटी भरने के लिए उनका मुवक्किल तैयार हैं। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद आखिरकार कोर्ट ने तीनों आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी।
बता दें कि रतिया के पूर्व एसडीएम भारत भूषण कौशिक, उनकी पत्नी सारिका सहित छह लोगों के खिलाफ विजिलेंस ने विगत 24 दिसंबर को भ्रष्टाचार का केस दर्ज किया था। विजिलेंस अब तक मामले में नामजद आरोपी पटवारी मदनलाल को गिरफ्तार कर चुकी है। वहीं अन्य आरोपी फिलहाल फरार हैं। सरकार ने मामले में कार्रवाई करते हुए एचसीएस भारत भूषण कौशिक का रतिया से तबादला कर दिया है।