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पंजाबी सभा अस्पताल गबन मामले में अदालत ने एसआईटी को पूरा रिकार्ड सहित किया तलब

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पंजाबी सभा अस्पताल। - फोटो : Fatehabad
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फतेहाबाद। फतेहाबाद के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी रामवतार पारीख की अदालत ने चार वर्षों से अदालत में चल रहे पंजाबी सभा अस्पताल में गबन, फर्जी हस्ताक्षर और लाखों रुपये के घोटाले के मामले में सुनवाई करते हुए कड़ा रुख अख्तियार किया है। अदालत ने एसआईटी के डीएसपी आर्यन चौधरी और सिरसा इक्नोमिक्स सेल के इंचार्ज प्रताप सिंह को 22 जनवरी को पूरी टीम के साथ सारा रिकार्ड सहित तलब किया है। इस मामले में फतेहाबाद पंजाबी सभा अस्पताल के संस्थापक हरबंस लाल वढेरा ने 18 अप्रैल 2016 को चंद्रभान, मदन मुटरेजा और महेंद्र मेहता सहित 8 पर गबन, फर्जी हस्ताक्षर करने व 80 लाख रुपये की खरीददारी का हिसाब-किताब न देने का मामला दर्ज कराया था।
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शिकायतकर्ता हरबंस लाल द्वारा 30 मई 2019 व 20 सितंबर 2019 को दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी फतेहाबाद ने मामले की जांच कर रही एसआईटी को मुकदमे से संबंधित फर्जी हस्ताक्षर वाले दस्तावेज, मेडिकल शॉप नीलामी की राशि बैंक में जमा न होने और 80 लाख की खरीदारी के बिल तथा फर्जी मेंबरशिप रसीद बुक कब्जा में लेने बारे आदेश दिए थे। अदालत ने इस बारे में 20 नवंबर को रिपोर्ट देने को कहा था। अदालत ने आदेशों में कहा था कि अगर अस्पताल के मैंबरशिप व अस्पताल की रजिस्ट्रेशन / सोसायटी पंजीकरण में ओमप्रकाश सरदाना के फर्जी हस्ताक्षर किए हैं उसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाए। इस बीच 20 नवंबर को जांच अधिकारी ने अदालत में स्टे्टस रिपोर्ट जमा करवाई। मंगलवार को शिकायतकर्ता हरबंस लाल वढेरा ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि अदालत के आदेशों के बावजूद एसआईटी के इंचार्ज आरोपियों को बचाने का काम कर रहे हैं। इस मामले पर सुनवाई करते हुए सीजेएम रामवतार पारीख ने एसआईटी के इंचार्ज डीएसपी आर्यन चौधरी व एसआईटी की तरफ से पेश हुए सिरसा इक्नोमिक्स सेल के इंचार्ज प्रताप सिंह को आदेश दिए कि वह अगली तारीख पर पूरा रिकार्ड व पूरी एसआईटी टीम के साथ पेश हो।
मालूम हो कि इस मामले की जांच फतेहाबाद पुलिस कर रही थी लेकिन राजनीतिक दबाव के चलते इसे यहां से हिसार पुलिस को सौंप दिया गया। उसके बाद जींद तथा फिर इसकी जांच सिरसा एसआईटी को सौंप दी गई। इतना ही नहीं इस मामले में शिकायतकर्ता हरबंस लाल वढेरा व ओमप्रकाश सरदाना के विरुद्ध 5 दिसंबर 2016 को मामला दर्ज कर दिया गया।
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मंगलवार को सुनवाई के दौरान आरोपियों की तरफ से पवन चुघ ने अपने वकील की मार्फत पक्ष रखना चाहा लेकिन अदालत ने यह कहकर पक्ष सुनने से इंकार कर दिया कि इस स्टेज पर उन्हें अपना पक्ष रखने का कोई अधिकार नहीं है। गौरतलब है कि शिकायतकर्ता हरबंस लाल ने इससे पहले हाईकोर्ट में इस मुकदमे की जांच सीबीआई से करवाने की याचिका दायर कर रखी है जिसमें अगली सुनवाई 16 जनवरी को होनी है अगर सीजेएम की अदालत से पहले हाईकोर्ट का फैसला आता है तो इसमें कई पुलिस अधिकारियों पर गाज गिरने की संभावना है।
करीब 22 साल पहले हुआ था अस्पताल का निर्माण
करीब 22 साल पहले पंजाबी सभा द्वारा भट्टू रोड पर अस्पताल का निर्माण किया था लेकिन सदस्यों के आपसी मतभेद के कारण यह शुरू नहीं हो सका। 8 साल पहले इसका संचालन शुरू हुआ तो इसके प्रोजेक्ट चेयरमैन चंद्रभान ने कथित रूप से फर्जी सदस्य बनाए। आरोप है कि चंद्रभान ने अस्पताल व सोसायटी अपने नाम कराने के लिए संस्था के संस्थापक सदस्य व भूमि दान कर्ता ओमप्रकाश सरदाना के फर्जी हस्ताक्षर करके रजिस्ट्रेशन अपने नाम करवाने का प्रयास किया। आरोप है कि चंद्र भान इत्यादि 8 लोगों ने मेडिकल की दुकान के पैसे बैंक में जमा नहीं करवाए, अस्पताल में खरीददारी के बिल नहीं दिखाए तथा लाखों रुपये के गबन कर गए। इस मामले में हरबंस लाल ने 18 अप्रैल को सभी 8 सदस्यों पर मुकदमा दर्ज करवाया था। इसी बीच आरोपियों ने भी हसबंस लाल आदि पर 5 दिसंबर को मामला दर्ज करवा दिया।
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