किसान संघर्ष समिति की बैठक फतेहाबाद में रविंद्र सिंह हिजरावां खुर्द की अध्यक्षता में हुई। बैठक में मुख्य वक्ता के तौर पर प्रगट सिंह जामाराय व धर्मेंद्र नवांशहर ने भाग लिया। बैठक में 26 जनवरी के आंदोलन की तैयारियों को अंतिम रूप देते हुए निर्णय लिया कि 21, 22 और 23 जनवरी को किसान संघर्ष समिति के जत्थे सिरसा, हिसार व फतेहाबाद के किसानों के साथ दिल्ली कूच करेंगे।
इस दौरान 51 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया, जो दिल्ली आंदोलन को सफल बनाने के लिए काम करेगी। बैठक में सभी सदस्यों को जिम्मेदारियां भी बांटी गई। बैठक में संयुक्त मोर्चा के नेता प्रगट सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार कृषि कानूनों को रद्द करने में देरी कर रही है। 26 जनवरी को देश का सबसे बड़ा आंदोलन होने जा रहा है। इसको लेकर लाखों युवा दिल्ली कूच कर रहे हैं। सरकार को युवाओं की भावनाओं को देखते हुए तीनों कानून निरस्त करने होंगे। उन्होंने कहा कि देश का अन्नदाता अपने खेत बचाने के लिए दिल्ली की सड़कों पर करीब 2 महीनों से बैठा है और प्रधानमंत्री किसानों की आवाज नहीं सुन रहे। किसान आंदोलन को फेल करने के लिए सरकार तरह-तरह के हथकंडे अपना रही है। बैठक में सुखदीप सिंह रंधावा, दर्शन, ओमप्रकाश हसंगा, निर्मल बाड़ा, प्रीतू कमाना, मलकीत हिजरावां कलां, मनप्रीत, टिंकू सालमखेड़ा, कल्याण धांगड़ सहित कई सदस्य मौजूद रहे।
किसान अब कृषि कानूनों को रद्द करवाकर ही वापस आएंगे : धर्मेंद्र
किसान नेता धर्मेंद्र नवांशहर ने कहा कि किसान अब कृषि कानूनों को रद्द करवाकर ही वापस आएंगे, वे सिर पर कफन बांधकर घर से निकले है। भाजपा के नेता किसानों को तथाकथित किसान बता रहे हैं, ऐसे भाजपा व जेजेपी के नेताओं को गांव में नहीं घुसने दिया जाएगा। 70 से ज्यादा किसान टीकरी बॉर्डर पर जान दे चुके हैं। अंत में मनदीप नथवान ने कहा कि किसानों को यूरिया के लिए भी परेशान होना पड़ रहा है। प्रशासन यूरिया खाद पर ब्लैक बंद करवाने में असफल रहा है।