फतेहाबाद। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) द्वारा गठित निगरानी समिति के अध्यक्ष जस्टिस प्रीतम पाल व उनकी टीम ने नगर परिषद प्रशासन द्वारा शहर में कचरा निस्तारण के लिए बनाए गए तरीकों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जस्टिस प्रीतम पाल और उनके साथ आए तकनीकी विशेषज्ञ डॉ. बाबूलाल अधिकारियों को साथ लेकर बुधवार को बीघड़ रोड स्थित कचरा निस्तारण प्लांट का निरीक्षण करने पहुंचे थे।
यहां नगर परिषद के एक्सईएन अमित कौशिक द्वारा बताई गई रिपोर्ट पर तकनीकी विशेषज्ञ ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि आपने 90 फीसदी सेग्रीगेशन का दावा किया है, लेकिन यहां तो सारा तरीका ही गलत है। ऐसे तो लोगों को मिस गाइड कर रहे हो। ठेका लेने वाली एजेंसी की तो मौज हो जाएगी। उसको पैसा बनाने का आसान तरीका मिल जाएगा। इस पर एक्सईएन ने कहा कि उनके पास जगह की कमी है, इसी कारण सारी दिक्कत आ रही है। मगर उनके जवाब से तकनीकी विशेषज्ञ व उनके साथी संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने डोर-टू-डोर कलेक्शन और सेग्रीगेशन संबंधी लगाए गए टेंडर को भी रद्द करने के निर्देश दिए। इस पूरे निरीक्षण के दौरान डीएमसी अजय चोपड़ा और नप के ईओ ऋषिकेश चौधरी मूकदर्शक बनकर एक तरफ खड़े रहे।
एक्सईएन से बोले- पूरे विभाग में अनपढ़ तो नहीं बैठे
एनजीटी अधिकारियों के सवाल उठाए जाने पर जब एक्सईएन अमित कौशिक ने मुख्यालय से ही पूरे जिले में आरएफपी एक जैसी देने की बात कही तो इस पर तकनीकी विशेषज्ञ ने कहा कि पूरे विभाग में अनपढ़ तो नहीं बैठे हैं। सारी जगह एक जैसे काम कैसे हो सकता है। उन्होंने उदाहरण देकर कहा कि करनाल में बढ़िया काम कैसे हो गया। इस पर एक्सईएन ने जवाब दिया कि वहां सेग्रीगेशन और कचरा डालने के लिए अलग-अलग जगह है। तभी टीम के ही एक सदस्य ने कहा कि अगर बेहतर तरीके से काम किया जाए तो उपलब्ध जगह में ही व्यवस्था बन सकती है।
प्लांट में कचरा लाकर सेग्रीगेशन करने पर जताई नाराजगी
दरअसल, एक्सईएन ने तकनीकी विशेषज्ञ को बताया कि वह शहर से कचरा प्लांट में लाते हैं। यहां गीले व सूखे कचरे को अलग-अलग किया जाता है। तकनीकी विशेषज्ञ ने इसी पर नाराजगी जाहिर कर दी। उन्होंने कहा कि गीला व सूखा कचरा तो सॉर्स प्वाइंट पर ही किया जाना चाहिए। यहां लाकर सेग्रीगेशन करना तो बिल्कुल गलत है। जब एक्सईएन ने जगह नहीं होने की बात दोहराई तो तकनीकी विशेषज्ञ ने प्लांट में पिट की संख्या बढ़ाकर उनमें सेग्रीगेशन करने के निर्देश दिए।
अपने साथी से बोल- इनको कुछ नहीं आता
तकनीकी विशेषज्ञ डॉ. बाबूलाल ने तुरंत एक्सईएन को मुख्यालय से मिली आरएफपी को उनकी टीम के साथ साझा करने के निर्देश दिए। सारी जानकारी लेने के बाद तकनीकी विशेषज्ञ ने अपने साथी से नगर परिषद अधिकारियों का हवाला देकर कहा कि इनको कुछ नहीं आता है। ये क्या मॉनिटरिंग कर रहे हैं, इस तरह तो दो महीने बाद आएंगे तो भी यही स्थिति मिलेगी। सुधार की बड़ी जरूरत है, तरीकों को भी बदलना पड़ेगा।
निरीक्षण से पहले अधिकारियों के साथ की बैठक
जस्टिस प्रीतम पाल व उनकी टीम ने निरीक्षण से पहले लघु सचिवालय के सभागार में जिला पर्यावरण प्रबंधन योजना के संबंध में विभिन्न विभागों के अधिकारियों की समीक्षा बैठक ली। बैठक में उन्होंने गांवों पर जोर देते हुए कहा कि गांवों में तरल और ठोस कचरा प्रबंधन, जल प्रबंधन और वायु प्रदूषण से संबंधित गतिविधियां आयोजित की जाएं। सभी प्रकार के वेस्ट का उचित निष्पादन किया जाए। विभिन्न स्टॉक होल्डर व रिहायशी कल्याण समिति, स्कूल, कॉलेज, सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं व वॉलंटियर का सहयोग लिया जा सकता है।
गांवों में बारिश के पानी का अलग हो तालाब
जस्टिस प्रीतम पाल ने गांवों में फेज अनुसार घर-घर से कूड़ा एकत्रित करने, ठोस व तरल कचरा प्रबंधन का प्लान तैयार करने के आदेश दिए। उन्होंने कहा कि गांवों में एक तालाब ऐसा बनाया जाए, जिसमें केवल बारिश का पानी एकत्रित हो। गांवों के जोहड़ों में गंदे पानी के प्रबंधन व मैनेजमेंट के लिए प्लान बनाएं और इस पर काम करें। बैठक में डीसी प्रदीप कुमार, जिला नगर आयुक्त अजय चोपड़ा, एचएसवीपी के ईओ राजेश खोथ सहित संबंधित सभी विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
अब तक एजेंसी ने 42 हजार 204 टन को कूड़े के निस्तारण
नप प्रशासन ने पुराने कूड़े के निस्तारण के लिए एजेंसी को ठेका दिया हुआ है। इस एजेंसी ने अब तक 42 हजार 204 टन कूड़े का निस्तारण किया है।
30 सितंबर तक का दिया है समय
फतेहाबाद में पहले से कुछ सुधार हुआ है। मगर अभी भी खामियां है। अधिकारियों को इन्हें दुरुस्त करने के लिए 30 सितंबर तक का समय दिया गया है। इसके बाद कोई सुनवाई नहीं होगी।
-प्रीतम पाल, अध्यक्ष, निगरानी समिति (एनजीटी)
कोट
भविष्य में अब कचरा कलेक्शन से लेकर निस्तारण तक का सारा कार्य एनजीटी की टीम के निर्देशों के अनुसार ही करवाया जाएगा। 30 जून तक का हमें समय दिया गया है।
-अमित कौशिक, एक्सईएन, नगर परिषद फतेहाबाद