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71 गांवों की डेढ़ लाख से ज्यादा आबादी सिर्फ सात चिकित्सकों के सहारे

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जाखल। जिला मुख्यालय से 62 किलोमीटर दूर पंजाब बॉर्डर स्थित जाखल शहर में भी चिकित्सा सुविधा नाममात्र ही हैं। यहां बने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकों व स्टाफ का टोटा मरीजों के स्वास्थ्य पर भारी पड़ रहा है। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति ऐसी है कि जाखल क्षेत्र के 71 गांवों की डेढ़ लाख से ज्यादा आबादी मात्र सात मेडिकल ऑफिसर के सहारे है। सीएचसी का बड़ा भवन और 30 बेड तो सरकार ने उपलब्ध करवा दिए, लेकिन चिकित्सकों की कमी पूरी नहीं हो सकी है। सीएचसी में 16 मेडिकल ऑफिसर के पद हैं, इनमें से सात खाली हैं जबकि दो डेपुटेशन पर गए हुए हैं। हालात ऐसे हैं कि अगर कोई बड़ी सड़क दुर्घटना हो जाए तो घायल लोगों को मरहम पट्टी के अलावा कोई उपचार नहीं मिलेगा।
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बाल रोग विशेषज्ञ के पद खाली, निजी अस्पताल ले जाने पड़ते हैं बच्चे
सीएचसी जाखल में बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। इस कारण बीमार बच्चों को प्राइवेट अस्पतालों में ले जाना पड़ता है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार अपने बच्चों का ठीक ढंग से इलाज भी नहीं करवा पा रहे हैं। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं की डिलिवरी एक महिला चिकित्सक और स्टाफ नर्स के सहारे है। जिस गर्भवती महिला में खून की कमी हो या गर्भ में बच्चा कमजोर हो तो उसे पहले ही रेफर कर दिया जाता है। सीएचसी में अल्ट्रासाउंड मशीन का भी कोई प्रबंध नहीं है।
चिकित्सकों के कुल पद 16
कार्यरत चिकित्सक 7
डेपुटेशन पर चिकित्सक 2
खाली पद 7
स्टाफ नर्स के कुल पद 18
स्टाफ नर्स के खाली पद 6
फार्मासिस्ट के कुल पद 6
फार्मासिस्ट के खाली पद 3
धूल फांक रही लाखों रुपये कीमत की एक्स-रे मशीन
स्वास्थ्य विभाग द्वारा सीएचसी जाखल में कुछ वर्ष पहले लाखों रुपये की लागत से एक्स-रे मशीन भेजी गई थी। मगर कुछ महीने बाद ही रेडियोग्राफर का पद रिक्त होने के कारण अब यह मशीन धूल फांक रही है। एक्स-रे करवाने के लिए भी लोगों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है। इस मशीन का काफी लंबे समय से उपयोग न होने के कारण उसे जंग लग गई है।
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वर्जन
जाखल सीएचसी ही नहीं पूरे स्वास्थ्य विभाग में चिकित्सकों की कमी है। एक्स-रे मशीन रेडियोग्राफर नहीं होने के कारण बंद है। सुविधाओं की कमी को लेकर उच्चाधिकारियों को पत्र लिखे हुए हैं।
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डॉ.राजेश क्रांति, सहायक एसएमओ, जाखल सीएचसी
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