फतेहाबाद। राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वे को लेकर सरकारी स्कूलों में मॉक टेस्ट शुरू हो चुके हैं। मॉक टेस्ट में शिक्षकों को पता लगाना है कि विद्यार्थी किस विषय में कमजोर है। लेकिन शिक्षा विभाग मॉक टेस्ट के नाम पर खानापूर्ति कर रहा है। शुक्रवार को शुरू हुए मॉक टेस्ट का प्रश्नपत्र स्कूल के मुखियाओं को वीरवार रात 9 बजे मेल पर भेजा गया।
अधिकतर स्कूल के मुखिया को मेल पर प्रश्नपत्र आने का पता नहीं चला और जिन्हें पता लगा वह रात को दुकानों पर कक्षा में विद्यार्थियों के हिसाब से प्रिंट निकलवाने के लिए भटकते रहे। ये ही नहीं शुक्रवार को होने वाले मॉक टेस्ट को लेकर कई स्कूल मुखियाओं को ये भी मालूम नहीं था कि प्रश्नपत्र आखिर कहां से मिलेंगे। इसके चलते कई स्कूलों में पहले दिन मॉक टेस्ट हो ही नहीं पाए।
इन कक्षाओं के विद्यार्थियों का होगा सर्वे
एनसीआरटी की तरफ से तीन साल में एक बार राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण करवाया जाता है। 2017 में ये सर्वेक्षण हुआ था। 2020 में होना था लेकिन कोरोना महामारी के चलते नहीं हुआ। अब 12 नवंबर को करवाया जा रहा है। शिक्षा विभाग जिले के रैंडम स्कूलों में कक्षा तीसरी और पांचवीं के विद्यार्थियों की हिंदी, गणित और ईवीएस, कक्षा आठवीं के विद्यार्थियों कीं सामाजिक और विज्ञान, हिंदी और गणित तथा दसवीं के विद्यार्थियों कीं सामाजिक, विज्ञान, हिंदी, गणित तथा इंग्लिश विषय की परीक्षा लेगा।
कोट
राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण को लेकर 12 नवंबर को परीक्षा होनी है। मॉक टेस्ट शुरू हो चुके हैं, लेकिन इसको लेकर विभाग औपचारिकता निभा रहा है। जबकि इसे गंभीरता से लेना चाहिए और प्रश्नपत्र जिला स्तर पर छपवाकर स्कूलों में भेजे जाने चाहिए। बाजार से छपवाने पर काफी राशि खर्च हो रही है। रात 9 बजे प्रश्नपत्र मेल पर भेजकर खानापूर्ति की जा रही है, जो कि उचित नहीं है।
- सुरेंद्र पाल नैन, जिला प्रधान, राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ