जाखल में बीडीपीओ को ज्ञापन सौंपते मनरेगा मजदूर । स्त्रोत संगठन
जाखल। खंड के कई गांवों के मजदूरों ने सोमवार को मनरेगा योजना का नाम बदलने पर बीडीपीओ कार्यालय में प्रदर्शन करते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ रोष जताया। मनरेगा मजदूरों ने कहा कि वीबी जीरामजी कानून वापिस लेकर मनरेगा को पुन: लागू किया जाए।
उन्होंने अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन बीडीपीओ को सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने नए कानून का विरोध किया ओर कहा कि मनरेगा कानूनी मांग आधारित और विकेंद्रित अधिकार है। यह करोड़ों ग्रामीण परिवारों, महिलाओं, दलितों को आजीविका की सुरक्षा देता है। नए कानून में इस अधिकार को समाप्त कर मनरेगा को बजट नियंत्रित योजना में बदल देता है।
इसमे काम-बजट और प्राथमिकता केंद्र से तय होंगी। मजदूरों ने कहा कि पहले बजट फिर काम दिया जाएगा। इससे मनरेगा की आत्मा पर सीधा हमला होगा। ये सीधे तौर पर मजदूरों के साथ गलत होगा। मजदूरों ने कहा कि यह विधेयक बिना मजदूरों, ग्राम सभाओं ओर श्रमिक संगठनों से परामर्श के लाया गया है।
उन्होंने कहा कि न इसका नाम बदलना चाहिए ओर न ही इसके अधिकार। किसान नेता जग्गी महल ने बताया कि सरकार व प्रशासन को 15 जनवरी तक का समय दिया गया है, अगर उनकी मांग पूरी न हुई तो वह बड़े स्तर पर धरना प्रदर्शन करने को लेकर मजबूर होंगे। इस प्रदर्शन में रिंकू, चमकौर, रामफल, लखवीर, कविता, रेखा व दविंदर सिंह आदि मौजूद रहे।